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है दूर मंज़िल घना तिमिर है------ग़ज़ल, इस्लाह की गुजारिश के साथ

12122 12122 12122 12122

है दूर मन्ज़िल तिमिर घनेरा, अगर कलम की डगर कठिन है
नहीं थकेंगे कदम हमारे हमारा व्रत भी मगर कठिन है

चलो उठाओ तमाम बातें जवाब सारा कलम ही देगी
चले भले ही कदम अभी कम पता है हमको सफर कठिन है

मना ले जश्नां उड़ा मज़ाकाँ ज़माने दूँगा सलाम लाखों
सलाम वापस इधर ही होंगे हालाँकि तुमसे समर कठिन है

न पूछ काहें मैं अक्षरों की ये धार सब पर बिखेरुँ पल पल
है इक हिमालय यहाँ भी ग़म का सो आँसुओं की लहर कठिन है

दुआएं उनको जो साथ में हैं दुआ उन्हें भी जो घात पर हैं
मगर नहीं हूँ हताश किंचित प्रयास का हर असर कठिन है

यूँ ही सरोवर में खिल गया हो ये ऐसा पंकज नहीं कदाचित
निगाह जिसमें नहीं हो पानी वहाँ पे इसका बसर कठिन है

मौलिक-अप्रकाशित

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on October 5, 2018 at 11:03pm

आदरणीय शेख शहज़ाद सर बहुत बहुत आभार

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 5, 2018 at 9:48pm

अंधकार में दूर लक्ष्य और कलम का साथ और सतत प्रयास। बेहतरीन सृजन हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा  'वात्स्यायन' साहिब।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on September 19, 2018 at 9:55pm

आदरणीय बाऊजी प्रणाम।

आपके सुझाव के अनुरूप सुधार करता हूँ

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on September 19, 2018 at 9:53pm

आदरणीय अजय जी बहुत आभार

Comment by Samar kabeer on September 13, 2018 at 3:14pm

मेरे कहे को मान देने के लिए धन्यवाद ।

Comment by Ajay Kumar Sharma on September 13, 2018 at 3:10pm

परम् आदरणीय कबीर सर क्षमा प्रार्थी हूँ. आइन्दा से इस बात काखयाल रखूँगा. 

Comment by Samar kabeer on September 13, 2018 at 3:06pm

अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

मतले के दोनों मिसरों में "गर" के क़वाफ़ी दोषपूर्ण हैं, किसी एक मिसरे का क़ाफ़िया बदलने का प्रयास करें ।

Comment by Samar kabeer on September 13, 2018 at 2:56pm

//

बहुत सुन्दर रचना...

हार्दिक बधाई...//

भाई अजय कुमार शर्मा जी,इतनी छोटी टिप्पणी देना ओबीओ की परिपाटी नहीं है,ऐसा सोशल मीडिया पर चलता है, यहाँ नहीं,यहाँ पहले रचनाकार को आदर से सम्बोधित करते हैं,फिर उसकी रचना के गुण दोष बताये जाते हैं,कृपया मंच की गरिमा का ध्यान करें यही निवेदन है ।

Comment by Ajay Kumar Sharma on September 12, 2018 at 1:35am

बहुत सुन्दर रचना...

हार्दिक बधाई...

कृपया ध्यान दे...

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