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हिन्दू - मुस्लिम का कहें, एक रंग है खून.
हिन्दू हिन्दू में फरक, क्यों करता कानून.
सबके दो हैं हाथ, पाँव भी सबके दो हैं.
नाक सभी के एक, सूँघते जिससे वो हैं.
नयन जिसे भी मिले,जगत के दर्शन करता.
कान और मुँह से, सुनता - वर्णन करता.
सात दिन मिले सभी को, हफ्ते में एक समान.
विद्यालय में गुरु सभी को, देता ज्ञान समान.
अन्न नहीं करता देने में, ताकत कोई भेद.
मनु के पुत्र सभी मनुष्य हैं, कहते सारे वेद.
सूरज सबके लिए चमकता, सबको राह दिखाता.
श्वांस सभी पवन से पाते, जो है जीवन-दाता.
पानी पावक तथा पवन, धरती और गगन.
सबको मिलते उतने, जितना किया जतन.
प्रकृति का है न्याय, कर्म बिन फल ना देती.
हक़ लायक को मिले, ये दखल न देती.
ऐसा ही हो जाये तो, संसार सुधर जायेगा.
हर भेदभाव से उठकर, ये देश सँवर जायेगा.
'हिन्दुस्तान' ह्रदय में मेरे, करुणा भरी अपार.
हिन्दू-मुस्लिम, ऊँच-नीच का, इसमें नहीं विचार.
गंगा धर शर्मा 'हिन्दुस्तान'
अजमेर (राज.)

मौलिक एवम् अप्रकाशित 

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Comment by Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' on August 30, 2018 at 12:45pm

आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी, कुशक्षत्रप जी, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी एवं समर कबीर साहब...आप सबका तहे दिल से शुक्रिया...कुशक्षत्रप जी एवं समर कबीर साहब के द्वारा शिल्पगत जिज्ञासा के सन्दर्भ में बताना चाहूँगा कि यह रचना एक भाव प्रवाह मात्र है जिसे विधा के बन्धनों से मुक्त रखा गया है....आप गुणीजन चाहें तो इसे मुक्त छंद/बहु छंद/छंद समूही जैसे किसी नाम की सीमा में बांध सकते हैं...अथवा अन्य किसी खाके में इसे समाहित किया जा सकता हो तो कृपया मेरा मार्गदर्शन कर अनुगृहीत करें...

Comment by Samar kabeer on August 27, 2018 at 3:06pm

जनाब गंगा धर शर्मा जी आदाब,ये प्रस्तुति किस विधा में है? बताने का कष्ट करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 27, 2018 at 9:58am

सुंदर भाव के लिए हार्दिक बधाई...

Comment by नाथ सोनांचली on August 26, 2018 at 1:38pm

आद0 गंगाधर शर्मा जी सादर अभिवादन। कविता में बातें बहुत उम्दा कही है आपने। मेरी बधाइयां आपको। पर एक बात पूछना चाहूँगा की इस रचना का शिल्प क्या है क्योकि बिना शिल्प जाने गुण दोष पर टिप्पणी करने सम्भव नहीं। सादर

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 26, 2018 at 1:04pm

"हम सुधरेंगे, लोकतंत्र सुधरेगा; दुनिया सुधरेगी!" - समसामयिक माहौल पर बेहतरी प्रेरक अभिव्यक्ति से सराबोर रचना। हार्दिक बधाई जनाब गंगाधर शर्मा  साहिब।

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