For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरा घर - लघुकथा –

मेरा घर - लघुकथा –

"हद हो गयी, अभी तीन दिन पहले ही साफ किया था  जाला। फिर बना लिया"।

कमला झाड़ू लेकर मकड़ी के जाले को जैसे ही साफ करने लगी।

मकड़ी गिड़गिड़ाते हुये बोली,"क्या बिगाड़ा है मैंने तुम्हारा। क्यों मेरा घर संसार उजाड़ रही हो"?

"अरे वाह, मेरे ही घर में बसेरा कर लिया और मुझे ही ज्ञान दे रही हो"।

"हर कोई किसी ना किसी पर आश्रित है। संसार की यही रीति है"।

"होगी, पर मुझे तो नहीं पसंद। और यह तुम्हारा घर संसार। क्या है इसमें? जीवन भर की क़ैद। उम्र भर छटपटाकर इसी में अंत"।

"ओहो, और तुम्हारा, कभी सोचा है अपने जीवन के बारे में? तुम तो मुझसे भी बुरी तरह उलझी हुई हो, इस अपने ही बनाये मकड़जाल में। जिसे तुम दिन रात मेरा मेरा करती हो, तुम भी तो इसी में एक दिन खत्म हो जाओगी"।

मकड़ी के मुँह से इतनी यथार्थ और भेद भरी बात सुनकर कमला के हाथ से झाड़ू छूट कर दूर जा गिरी। वह अपने आप को एक मामूली सी मकड़ी के सामने तुच्छ और असहाय महसूस कर रही थी।

मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 190

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on August 7, 2018 at 7:30pm

हार्दिक आभार आदरणीय नीलम उपाध्याय जी।

Comment by Neelam Upadhyaya on August 6, 2018 at 5:05pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी, परिवार में स्त्री की स्थिति के यथार्थ को दर्शाती  अच्छी लघुकथा हुयी है।  प्रस्तुति के लिए बधाई। 

Comment by TEJ VEER SINGH on August 5, 2018 at 5:29pm

हार्दिक आभार आदरणीय बबिता गुप्ता जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 5, 2018 at 5:28pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।

Comment by babitagupta on August 5, 2018 at 3:47pm

स्त्री जीवन को आइना दिखाती मकड़ी,बेहतरीन लघु कथा,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by Samar kabeer on August 4, 2018 at 12:03pm

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 4, 2018 at 11:27am

हाएदिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।लघुकथा पर आपने जो विस्तृत टिप्पणी द्वारा विवेचना और व्याख्या की है उसने मेरा और मेरी लघुकथा का उत्साह वर्धन किया है।शुक्रिया।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 4, 2018 at 1:50am

एक अहम मानव पात्र लेते हुए मुख्य मानवेतर पात्र के जीवन से तुलनात्मक अवलोकन पेश कर यथार्थपूर्ण/कटाक्षपूर्ण मानव-जीवन.रहस्य उभारती बेहतरीन मानवेतर लघुकथा सृजन हेतु सादर हार्दिक बधाइयां  और यूं हमें मार्गदर्शित करने हेतु हार्दिक आभार आदरणीय तेजवीर सिंह  साहिब।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

dandpani nahak commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post आदमी - ग़ज़ल
"जब मिला आदमी में मिला आदमी वाह क्या कहने भुत उम्दा! आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी"
4 hours ago
dandpani nahak left a comment for Saurabh Pandey
"परम आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी आदाब मैं बता नहीं सकता कितना खुश हूँ कि मेरी रचना को आपने सराहा बहुत…"
6 hours ago
dandpani nahak left a comment for अजय गुप्ता
"आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी उसे सराहा उसके लिए बहुत शुक्रिया"
6 hours ago
dandpani nahak left a comment for Dr Amar Nath Jha
"आदरणीय डॉ. अमर नाथ झा जी आदाब और बहुत बहुत शुक्रिया आपकी हौसला अफ़ज़ाई का"
6 hours ago
dandpani nahak left a comment for Md. anis sheikh
"आदरणीय मोहम्मद अनीस शेख साहब आदाब हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया"
9 hours ago
dandpani nahak left a comment for Amit Kumar "Amit"
"आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया"
9 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

रैन पर कुछ शृंगारिक दोहे :

रैन पर कुछ शृंगारिक दोहे :अंतर्मन के रात को , उदित हुए जज़्बात। नैन लजीले कह गए,शरमीली सी…See More
9 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post गंगा - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय अनामिका सिंह "अना" जी।"
10 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
""ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक 107 को सफ़ल बनाने के लिए सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का आभार व…"
19 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"शुक्रिया अनीस जी"
19 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"शुक्रिया अमित जी"
19 hours ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"जनाब समर कबीर साहब उपयोगी जानकारी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ...."
19 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service