For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लघुकथा- रिसते खूनी नासूर

सुबह से ठंडे चूल्हे को देख आहें भरती वह अपनी छः वर्षीय बेटी और तीन वर्षीय बेटे को पास बिठाए गहरे मातम में ड़ूबी थी। उसे लकवा सा मार गया था। उसका मस्तिष्क मानो सोचने-विचारने की क्षमता खो बैठा था। पूरी रात उसने वहीं जमीन पर बैठे गुज़ार दी थी। दोनों बच्चे भी वहीं उसकी गोदी में पड़े- पड़े कब सो गये थे उसे कोई होश ही नहीं था। पड़ोस की बूढ़ी अम्मा ही बच्चों के लिए खाना ले आई थी। 

" आह..! अब ऐसे घिनौने पाप का साया मेरे और इन बच्चों के सिर पर हमेशा मँड़राता रहेगा।"

उसकी दुःखभरी कराहें निकल रही थीं ।

अपना बिस्तर उसे काँटों और आग की लपलपाती शैया सा महसूस हो रहा था। अपने शरीर पर पति के स्पर्श को याद कर उसे यूँ लगता मानो साँप-बिच्छू और कीड़े उस पर बिलबिलाकर रेंग रहे हैं । उसके कानों में तब मानो पिघला गर्म सीसा किसी ने उड़ेल दिया था जब उसने सुना कि उसका पति चार बरस की मासूम के साथ दुष्कर्म के अपराध में पकड़ा गया है..!

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 82

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 29, 2018 at 1:56pm

बहुत ही संवेदनशील विषय का चुनाव किया है आपने आदरणीया और कोशिश अच्छी की है उसके लिए बधाई...

Comment by Arpana Sharma on July 24, 2018 at 3:04pm

आदरणीया जनाब समर कबीर जी, श्री तेजवीर जी , आदरणीया नीलम जी एवं बबीता जी, मेरी लघुकथा पर आपके प्रोत्साहित करते उद्गार मुझे और भी बेहतर लिखने के लिए प्रेरित करते हैं। आप सभी का हार्दिक आभार

Comment by Samar kabeer on July 24, 2018 at 12:00pm

मुहतरमा अर्पणा शर्मा जी आदाब,उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 23, 2018 at 3:32pm

हार्दिक बधाई आदरणीय अर्पणा शर्मा जी। मार्मिक लघुकथा। आपने एक नाज़ुक विषय पर बेहद सावधानी एवम कुशलता से कलम चलाई है। सराहनीय क़दम।

Comment by Neelam Upadhyaya on July 23, 2018 at 2:50pm

 आदरणीया अर्पणा शर्मा जी, समाज की ज्वलन्त समस्या बन रहे विषय पर अच्छी लघुकथा की प्रस्तुति। बधाई स्वीकार करें । 

Comment by babitagupta on July 23, 2018 at 1:45pm

गिरती मानवीयता ,होते घृणित अपराधों ने नजदीकी रिश्तों पर से विश्वास उठता जा रहा हैं.आज सन्देहभरा जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैंज्वलंत आपराधिक समस्या का रचना द्वारा बेहतरीन प्रस्तुति  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीया अर्पणा दी.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७१
"हालात जीने के गराँ भी हों तो क्या बुराई हैमजनूँ मिले कहाँ अगर सहराओं में बसर न हो वाह बहुत खूबसूरत…"
9 minutes ago
Sushil Sarna commented on रामबली गुप्ता's blog post गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता
"सोच समझ कर बोलिए, बातें सदा विनीतछूटा धनु से बाण जो, लौटा कब हे! मीत बहुत सुंदर आदरणीय रामबली…"
12 minutes ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७१
"मुहतरम समर करीब साहब, क्या 'कैसे उड़ेगा वो जिसे उड़ने को बालो पर न हो' को यूँ करने से…"
35 minutes ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७१
"मुहतरम समर करीब साहब, आदाब. हौसला अफज़ाई और इस्लाह का तहेदिल से शुक्रिया. मतले में बदलाव लाता हूँ.…"
42 minutes ago
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७१
"जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । ' कैसे उड़ेगा वो जिसे…"
1 hour ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७०
"जी जनाब, इस अति उपयोगी जानकारी का हदय से आभार, सादर। "
1 hour ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post माँ शारदा का वरदान है प्यार
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,भारत में आपका स्वागत है । हमेशा की तरह एक उत्तम और गम्भीर रचना हुई…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post कविता -2 ( झंझावात )
"जनाब क़मर जौनपुरी साहिब आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष's blog post गृहस्थ
"जनाब नवीन श्रोत्रिय उत्कर्ष जी आदाब,ओबीओ पटल पर पहली बार आपकी रचना से रूबरू हो रहा हूँ । आल्हा वीर…"
1 hour ago
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post कविता-1 साथी सो न , कर कुछ बात
"जनाब क़मर जौनपुरी साहिब आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Moni joined Admin's group
Thumbnail

लघुकथा की कक्षा

समूह का उद्देश्य : लघुकथा विधा और उसकी बारीकियों पर चर्चा.समूह प्रबंधक : श्री योगराज प्रभाकरSee More
1 hour ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service