For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तन्हा तन्हा रहता हूँ,
मैं भी साये जैसा हूँ।

खाली मौसम होता है,
तुम बिन जब मैं होता हूँ।

मैंने तुमको अपना माना
मैं भी देखो कैसा हूँ।

उसकी आंखें बादल है
मैं भी भीगे रहता हूँ।

चुपके से सुन लेना तुम
जो भी तुमसे कहता हूँ।

जाने वालों जाओ तुम
अब थोड़ी मैं रोता हूँ।

अपनी सूखी आंखों में
अब भी सपने बोता हूँ।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 656

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by रक्षिता सिंह on June 27, 2018 at 1:39pm

आदरणीय सार्थक जी नमस्कार

सुन्दर पंक्तियों पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।।

Comment by Mahendra Kumar on June 26, 2018 at 10:17am

अच्छी ग़ज़ल है आदरणीय सार्थक जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर। 

Comment by Samar kabeer on June 25, 2018 at 11:39am

जनाब सार्थक जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'मैं भी भीगे रहता हूँ'

इस मिसरे पर कुछ विचार करें।

Comment by रोहित डोबरियाल "मल्हार" on June 24, 2018 at 8:56pm
Comment by Mohammed Arif on June 23, 2018 at 9:10pm

प्रिय सार्थक जी आदाब,

                  बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । गुणीजनों की बातों का संज्ञान  लेंं ।

Comment by gumnaam pithoragarhi on June 23, 2018 at 6:18pm

वाह बहुत खूब ग़ज़ल हुई है....... छोटी बह्र में खूब कहा है।।

Comment by Ravi Shukla on June 23, 2018 at 6:14pm

आदरणाीय साथर्क जी यद्यपि अापने गजल के अरकान नहीं  लिखें है  फिर भी बहरे मीर पर आपकी इस गजल के लिए बधाई स्वीकार करें । अच्छी गजल कही अापने ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनसुने अनकहे के बीच
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
yesterday
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service