For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ुलामी बहुआयामी (अतुकान्त कविता)

डिजिटल ग़ुलामी है बहुआयामी
शारीरिक नुमाइश हुई बहुआयामी
हैरत है, कहें किसको नामी और नाकामी
अनपढ़, ग़रीब, शिक्षित या असामी।

योग ग़ज़ब के हो रहे वैश्वीकरण में
मकड़जाले छाते रहे सशक्तिकरण में
छाले पड़े आहारनलिकाओं में
ताले संस्कृति और संस्कारों में
अधोगति, पतन सतत् रहे बहुआयामी
हैरत है, कहें किसमें खामी और नाकामी
अनपढ़, ग़रीब, शिक्षित या असामी।

शिक्षा, भिक्षा, रक्षा सभी बहुआयामी
लेन-देन, करता-धरता, कर्ज़दाता भी बहुआयामी
आज़ादी, तानाशाही, राजनीति बदलें परिभाषायें
आशायें-निराशायें छायीं बहुआयामी
हैरत है, कहें किसको दानी और दामी
अनपढ़, ग़रीब, शिक्षित या असामी।

डिजिटल ग़ुलामी है बहुआयामी
योग, भोग और खेल बहुआयामी
हैरत है, कहें किसको नामी और नाकामी
अनपढ़, ग़रीब, शिक्षित या असामी।

डिजिटल ग़ुलामी है बहुआयामी
भत्ता-सत्ता-नुमाइश हुई बहुआयामी
हैरत है, कहें किसको नामी और नाकामी
अनपढ़, ग़रीब, शिक्षित या असामी।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 494

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 22, 2018 at 6:40pm

डिजिटल गुलामी है बहु आयामी ...वाह्ह्ह्ह बहुत अच्छी सार्थक रचना बहुत बहुत बधाई आद० उस्मानी जी 

Comment by Neelam Upadhyaya on May 22, 2018 at 2:15pm

बहुत ही बढ़िया।  बधाई स्वीकार करें। 

Comment by Mohammed Arif on May 21, 2018 at 12:18pm

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                                     डिज़िटल आँधी ने सबकुछ तहस-नहस करके रख दिया है । हम सबकुछ भूल गए हैं । आपकी अबतक की सबसे अच्छी अतुकांत कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Shyam Narain Verma on May 21, 2018 at 10:50am
वाह बेहद खूबसूरत प्रस्तुति … हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
9 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
19 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service