For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

221 2121 1221 212


सब कुछ है मेरे पास मगर बेजुबान हूँ ।
क़ानून तेरे जुल्म का मैं इक निशान हूँ ।।

क्यूँ माँगते समानता का हक़ यहां जनाब ।
भारत की राजनीति का मैं संविधान हूँ ।।

उनसे थी कुछ उमीद मुख़ालिफ़ वही मिले ।
जिनके लिए मैं वोट का ताजा रुझान हूँ ।।

कुनबे में आ चुका है यहाँ भुखमरी का दौर ।
क़ानून की निगाह में ऊंचा मकान हूँ ।।

गुंजाइशें बढ़ीं हैं जमीं पर गिरेंगे आप ।
जबसे कहा है आपने मैं आसमान हूँ ।।

सदियों से गन्ध लोग मिटाते रहे मेरी ।
जिनको खबर है देश का मैं ज़ाफरान हूँ ।।

हालात पे न तंज अभी कीजिये हुजूर ।
मैं मुश्किलों के दौर का तीरो कमान हूँ ।।

सैलाब आ रहा है यहाँ ख़ामुशी के साथ ।
मैं तो सितम की आंच से उठता उफ़ान हूँ ।।

--नवीन मणि त्रिपाठी

मौलिक अप्रकाशित

Views: 59

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 17, 2018 at 1:29pm

आदरणीय नवीन जी बढ़िया ग़ज़ल हुयी है . इस रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 17, 2018 at 10:45am

बहुत खूब...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post सौदागर
"विरम चिन्ह संबंधित कुछ टंकण त्रुटियां रह गई हैं!"
11 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post सौदागर
" बेहतरीन क्षेत्रीय भाषा-संवादों में जमीर के सौदे और सौदागरों की हक़ीक़त पर ध्यान आकृष्ट कराती…"
12 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ताक रही गौरैया प्यासी - गीत
"आदरणीय बसन्त कुमार शर्मा जी इस मनमोहक सृजन के लिए …"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत...तितलियाँ अब मौन हैं-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय ब्रजेश कुमार जी आपकी भावपरक गीत पढ़कर बड़ी प्रसन्न…"
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Sushil Sarna's blog post पति ब्रांड ...
"आदरणीय सुशील सरना जी उम्दा भाव के साथ बेहतरीन सृजन …"
1 hour ago
Dr Ashutosh Mishra posted a blog post

सौदागर

सौदागर” प्रोफेसर सैन और प्रोफेसर देशपांडे  सरकारी मुलाजिम हैं, तनख्वाह भी एकै जैसी मिलत है लेकिन ई…See More
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post हिंदी
"आ. भाई छोटेलाल जी, हिन्दी दिवस पर अच्छी रचना हुई है। इस बधाई स्वीकारें ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post परिणाम....
"आ. भाई सुशील जी, सुंदर रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'सत्य अब तक!' (लघुकथा)
"आ. भाई शैख़ शहज़ाद जी, प्रभावशाली कथा हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रामबली गुप्ता's blog post बन के सूरज सा जमाने में निकलते रहिये-रामबली गुप्ता
"आ. भाई रामबली जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधायी ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post क्या मन है बीमार पड़ौसी - गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई तेजवीर जी, गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार ।"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - पहल हो गई
"हार्दिक बधाई आदरणीय  बसंत कुमार शर्मा जी। बेहतरीन गज़ल। चंद मिसरे लबों पर लरजते रहे…"
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service