For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया....संतोष!!

अरकान:-
मफ़ऊल फ़ाईलात मफ़ाईल फ़ाइलुन

यारों ख़ुदा ये देख के हैरान हो गया,
इंसा जिसे बनाया था हैवान हो गया।।

भेजा था इसको अम्न की ख़ातिर जहान में,
कैसे ख़िलाफ़ अम्न के इंसान हो गया।।

शैतान का भी शर्म से देखो झुका है सर,
इंसान ख़ुद ही आज तो शैतान हो गया।।

चिंता में बेटियों की हर इक बाप है यहाँ,
अब क्या बताऊँ मैं तो परेशान हो गया।।

ढाये यहाँ पे गंदी सियासत ने वो सितम,
लगता है जैसे मौत का सामान हो गया।।

#संतोष_खिरवड़कर
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 52

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by santosh khirwadkar on May 15, 2018 at 7:57pm

धन्यवाद आ.विजय जी !!!

Comment by vijay nikore on May 15, 2018 at 12:30pm

गज़ल अच्छी लगी। बधाई।

Comment by santosh khirwadkar on May 13, 2018 at 11:12am
प्रणाम आ. समर साहब ...शुक्रिया!!
अभी दुरुस्त कर लेता हूँ
Comment by santosh khirwadkar on May 13, 2018 at 11:11am
शुक्रिया भाई श्री निलेश जी
Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 13, 2018 at 8:40am

अच्छी ग़ज़ल हुई है संतोष दादा 
कहीं कहीं सपाट बयानी लग रही है..
सादर 

Comment by Samar kabeer on May 13, 2018 at 12:05am

जनाब संतोष जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

मतले के सानी मिसरे में 'इंसा' को ''इंसाँ" कर लें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"समय नहीं है अब ।"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"उपर अजय जी की ग़ज़ल पर मेरी टिप्पणी देखें।"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"ओबीओ लाइव तरही मुशायरा अंक-95 को सफल बनाने के लिये सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का हार्दिक आभार व धन्यवाद…"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"अजय जी, मत्ले के शेर को ही लें। आप क्या कहना चाह रहे हैं यह स्पष्ट नहीं है। शेर स्वयंपूर्ण…"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"'ज़ह-ए-नसीब कि ज़र्रे को आफ़ताब कहा' सुख़न नवाज़ी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आप तो स्वयं ही उस्ताद शायर हैं। कहने को कुछ नहीं सिवाय इसके कि मन आनंदित है।"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब तिलक राज कपूर साहिब,मुशायरे में आपका स्वागत है,लेकिन:- 'बड़ी देर की मह्रबाँ आते…"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"नीलेश भाई मैं तो अरसे बाद लौटा हॅूं, आपकी उपस्थिति देख कर आनंदित हूॅं। ग़ज़ल तो बहरहाल आपके कद के…"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"इश्क़ में जान भी देने का ये वाद: देखोशम्अ के रक़्स में आशिक़ को उतरता देखो। पाक रिश्ते की महक दूर…"
5 hours ago
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आदरनीय समर जी, बहुत शुक्रिया "
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"ग़ज़ल अभी और समय चाहती है,मोहन जी,ऊपर के तीन अशआर में अलिफ़ की जगह 'या', क़वाफ़ी ले लिए…"
5 hours ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"आदरणीय शिज्जु 'शकूर' जी, उम्दा पेशकश के लिए दिली मुबारकबाद कबूल करें"
5 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service