For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लघुकथा-बेटी बचाओ

उस दिन जन सामान्य का उत्साह देखते ही बनता था. टीवी, रेडियो, अखबार ..सब जगह नेता जी की पहल का चर्चा था. आख़िर किसी ने तो बेटी के महत्व को समझ कर बेटी बचाओ जैसा महान नारा दिया था समाज को ...
आज जब दो बेटियों के बलात्कार की और एक आठ साल की बेटी की नृशंस हत्या की ख़बर पढ़ी तो पहले पहल यह रोज़मर्रा की ख़बर ही लगी ... फिर ख़बर की डिटेल्स में पढने को मिला कि नेताजी के दल के लोग बलात्कारियों के समर्थन में सड़क पर तिरंगा लेकर वन्दे मातरम का घोष कर रहे हैं तो अचानक मन में यह सवाल उठ खड़ा  हुआ कि बेटी बचाओ एक नारा था या एक खुली चेतावनी...कि ..............अब हम आ गए हैं, अपनी बेटी बचाओ. 
.
निलेश "नूर"
मौलिक व अप्रकाशित  

Views: 67

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 18, 2018 at 8:11pm

धन्यवाद आ डॉ आशुतोष जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 18, 2018 at 8:11pm

धन्यवाद आ नीलम जी 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 18, 2018 at 3:21pm

आदरणीय भाई निलेश जी एक रचना में सन्देश प्रेषित करने का जो माद्दा होना चाहिए इस रचना में है ..कम शब्दों में जबरदस्त झटका देते इस रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by Neelam Upadhyaya on April 16, 2018 at 4:19pm

आदरणीय नीलेश जी, बहुत ही रचना । बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 16, 2018 at 9:06am

धन्यवाद आ, मोहम्मद आरिफ़ साहब,

मुझे नाहीं पता कि यह लघुकथा है या नहीं लेकिन मुझे यकीन है कि यह अपनी बात बुलंद आवाज़ में कह रही है और वही इसके होने का उद्देश्य भी है।

सादर

Comment by Mohammed Arif on April 15, 2018 at 7:45am

आदरणीय नीलेश जी आदाब,

                            प्रयास अच्छा है लेकिन यह लघुकथा के विधानों पर कतई खरी नहीं उतरती है । बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 15, 2018 at 5:46am

धन्यवाद आ शेख शहज़ाद उस्मानी साहब

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 15, 2018 at 5:45am

धन्यवाद आ अजय जी,

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 15, 2018 at 1:41am

अन्य रचनाकारों की तरह रेप पीड़िता के नाम का प्रचार-प्रसार किये बिना विश्व स्तर पर सार्थक   चिंतनन मनन को  प्रेरित करती बेहतरीन रचना।‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌

अंतिम भाग के लिए हार्दिक बधाई और आभार आदरणीय नीलेश शेव्गांवकर साहिब।

Comment by Ajay Tiwari on April 14, 2018 at 5:55pm

आदरणीय निलेश जी,

इस विधा में मेरी बहुत दखल नहीं है इस लिए मैं विधागत बारीकियों में जाऊंगा भी नहीं. लेकिन बात को साहसपूर्ण और प्रभावी ढंग से कहने के लिए हार्दिक बधाई. 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"हुईं हैं बाँझ ये आहें असर नहीं करतींदुआ-गो रहिए; दुआ कोई फल तो सकती है  । क्या ख़ूब अंदाज़ है !…"
4 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आ. भाई शिज्जू जी, बेहतरीन प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
6 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आ. अंजली जी, अच्छे भवों वाली सुंदर गजल हुई है । गुणी जनों की सलाह से यह और बेहतर हो जायेगा ।"
10 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"गर आप चाहें तबीअत बहल तो सकती है कोई मिलाप की सूरत निकल तो सकती है। लाजवाब मतला । मज़ा आ गया ।…"
12 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल का हर शे'र लाजवाब हुआ है कोटि कोटि बधाई ।"
22 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आ. भाई नीलेश जी, बेहतरीन पुछल्ले के साथ बेहतरीन गजल हुई है । बहुत बहुत हार्दिक बधाई ।"
26 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आ. भाई शिज्जू जी, गजल का अनुमोदन और उत्साह वर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
29 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"जी कहना चाहती हूँ कि फ़रिश्ते लेने आये हैं यानी मौत नज़दीक है मग़र वो आ जाएं तो टल भी सकती है। उनके…"
32 minutes ago
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय बासुदेव जी सादर नमन । ग़ज़ल का प्रयास बहुत अच्छा हुआ है बहुत बहुत मुबारकबाद।"
35 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय बासुदेव अग्रवाल जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारक़"
36 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी , बेहतरीन ग़ज़ल हुई। मुबारकबाद क़बूल करें"
37 minutes ago
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"जनाब अफरोज साहब आदाब। ग़ज़ल के बेहतरीन प्रयास के लिए बहुत बहुत मुबारक़बाद कबूल करे जी।"
38 minutes ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service