For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बेइंतहा  जिन्हें   हम,    दिन    रात    चाहते   हैं (ग़ज़ल)

मफ़ऊल फ़ाइलातुन मफ़ऊल फ़ाइलातुन 

वो    प्यार    का    हमारे,    इस्बात    चाहते    हैं।
बेइंतहा  जिन्हें   हम,    दिन    रात    चाहते   हैं।।

होकर     खड़े      हुए    हैं,    बेदार    सरहदों    पर,
जो    अम्न-ओ-चैन   वाले,   हालात   चाहते   हैं।।

सरहद    पे    पासवाँ   के,   देखो   कभी   हवासिल,
बस   आप   तो   सियासी,   जज़्बात   चाहते   हैं।।

ख़ुद  चल  दिए  न  जाने, क्यों  छोड़  कर  हमें  वो,
रखना  जिन्हें  हम   अपने,   आरात   चाहते    हैं।।

अपनी  ख़ुशी,   है अपनी,   ग़म   गैर   का   पराया,
ज़र    ज़िंदगी    में   इन्शाँ,   इफ़रात   चाहते   हैं।।

कल पहले अज़ अज़ल ही, कर डाला क़त्ल-ए-दुख्तर,
अब्ना    की   आज   क़ातिल,   बारात  चाहते   हैं।।


है  'दीप'  इस  तरह  कुछ,  उस  बज़्म  की  कहानी,
अश्आर   इश्क़   वाले,    हज़रात     चाहते     हैं।।

-प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप'

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 866

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on March 3, 2018 at 12:33pm

छटे शैर 'अज़' शब्द का इस्तेमाल वहाँ किया जाता है जहाँ इज़ाफ़त ज़ेर के रूप में नहीं लग सकती ।

'कल पहले अज़ अजल ही कर डाला क़त्ल-ए-दुख़्तर'

इस मिस्रेको यूँ कर सकते हैं :-

'कल मौत से ही पहले कर डाला क़त्ल-ए-दुख़्तर'

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 3, 2018 at 10:51am

सुंदर गजल...

Comment by प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' on March 2, 2018 at 11:46am

ग़ज़ल में शिरकत के लिये शुक्रिया जनाब नरेंद्र साहिब एवं जनाब राम अवध साहिब। 

Comment by प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' on March 2, 2018 at 11:45am

बेहद शुक्रिया जनाब हर्ष महाजन साहिब। 

Comment by प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप' on March 2, 2018 at 11:45am

ज़नाब समर साहिब! ग़ज़ल में शिरकत के लिए शुक्रिया।

हवासिल, हौसला का बहुवचन है।
आरात का अर्थ निकट या पास होता है।
इंसाँ से ही अर्थ लिया गया है।
अब्ना का अर्थ बेटों मतलब पुत्रों से लिया गया है।

उला में जो व्याकरणिक दोष है उस पर भी एक बार नज़रे इनायत कर दीजिये, मेहरबानी होगी। 

Comment by Samar kabeer on March 1, 2018 at 10:29pm

जनाब 'दीप' साहिब आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।

तीसरे शैर में 'हवासिल' का क्या अर्थ लिया है?

4थे शैर में 'आरात' का अर्थ बताएं?

5वैं शैर में 'इनशा' क्या 'इंसां' है?

6ठे शैर के ऊला में व्याकरण दोष है,और इसके सानी में 'अब्ना' का क्या अर्थ लिया है?

अगली प्रतिक्रया आपके जवाब के बाद ।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on February 27, 2018 at 9:35pm

आदर्णीय प्रदीपकुमार पाण्डे जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कहने के लिये बधाई। 

Comment by narendrasinh chauhan on February 27, 2018 at 11:47am

लाजवाब 

Comment by Harash Mahajan on February 27, 2018 at 11:24am

एक बेहतरीन पेशकश आदरणीय प्रदीप जी। दाद कबूल कीजियेगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें…"
18 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात…See More
20 hours ago
amita tiwari posted blog posts
23 hours ago
Admin replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक…"
yesterday
Admin posted discussions
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ।  डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी…"
Friday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
Friday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय प्रबंधन,यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service