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जल रहे चिराग हैं, जिंदा यहां तख़्त-ओ-ताज है
बह रही गोमती, रोशन यहां के घाट हैं
यह लखनऊ की धरती

यह लखनऊ की शाम है

तहजीब यहां अब्दो आब है,खिलते हर दिल में ख्वाब हैं
दुश्मन को भी कहते आप हैं,दोस्त भी अमें यार हैं
गंज की शाम है, बागों में भी बाग हैं
यह लखनऊ की धरती
लखनऊ की शाम है।

रूमी दरवाजा वो शान है, आज भी तहजीब उसकी आन है ।
इमामबाड़ा हिंदू मुस्लिम एकता की पहचान है
बेगम की कोठी में जलते चिरो चिराग,नक्खास पर सजती बाजार है,
बादरी की अपनी ही पहचान है ,
ये अवध की धरती है,
ये अवध की शाम है।

आरजू आराइश है, आलिम यहां आवाज़ है,
अहज़ान में बैठे जब, देख आशुफ्ता जहान को
आदिल हो बैठा दिल, दोस्त ईमान पर ,

मिलती यहां हर सीख है,अंजुमन में होती यहां की शाम है,
उजली अर्जमंद धरती, ये शहरों मे न शहर आम है  

ये यहां की शाम है।
ये अवध की शाम है।

                            पीयूष उमराव(पीय)

                            (मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by peeyush kumar on January 8, 2018 at 9:57pm
आदरणीय मो•आरिफ जी 
नमस्कार
आप ने रचना पसंद की,हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद।
मैं और भी रचनाओं में यह प्रयास जारी रखाने की कोशिश करूंगा।
🙏आभार
Comment by peeyush kumar on January 8, 2018 at 9:56pm
आदरणीय मोहित मिश्रा जी नमस्कार
आप ने रचना पसंद की,हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद।
🙏
Comment by peeyush kumar on January 8, 2018 at 9:56pm
आदरणीय समर कबीर जी प्रणाम
आप ने रचना पसंद की,हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद।
🙏
Comment by peeyush kumar on January 8, 2018 at 9:55pm
आदरणीय सुरेंद्र जी प्रणाम
आप के प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद,आगली रचना में उर्दू शब्दों का अर्थ अवश्य लिखदेंगे। आप का आभार🙏
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 8, 2018 at 1:44pm

आद0 पीयूष जी सादर अभिवादन। बेहतरीन रचना पर दिल खोल कर बधाई। कुछ कठिन उर्दू शब्दो के अर्थ भी लिख दें,तो रचना समझने में और आसानी हो। इस उत्तम प्रस्तुति पर कोटिश बधाइयाँ। सादर

Comment by Samar kabeer on January 7, 2018 at 4:10pm

जनाब पीयूष जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohit mishra (mukt) on January 7, 2018 at 9:49am

आदरणीय पियूष जी बेहतरीन रचना के लिए बधाई

Comment by Mohammed Arif on January 7, 2018 at 7:35am

आदरणीय पीयूष जी आदाब,

                            शान-ए-अवध का बहुत ही सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया आपने । आज पूरे मुल्क में हवा ही कुछ ऐसी चल रही है जो हमारी तहजीब को ख़त्म करने पर आमादा है ।इस सुंदर रचना पर हार्दिक बधाई.स्वीकार करें ।

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