For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल- सर पे मेरे तभी ईनाम न था।

बह्र - फाइलातुन मफाइलुन फैलुन

काबिले गौर मेरा काम न था
सर पे मेरे तभी ईनाम न था।

मैं जिसे पढ़ गया धड़ल्ले से,
वाकई वो मेरा कलाम न था।

हाट में मोल भाव क्या करता,
जेब में नोट क्या छदाम न था।

लोग मुँहफट उसे समझते थे,
जबकि वो शख्स बेलगाम न था।

गाँव के गाँव बाढ़ से उजड़े
बाढ़ का कोई इन्तजाम न था।

सर झुकाया नहीं कभी उसने,
वो शहंशाह था गुलाम् न था।

उसका मालिक तो बस खुदा ही था,
घर में जिनके दवा का दाम न था।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 1098

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on December 23, 2017 at 6:26pm

आदर्णीय तिवारी जी आप सही कह रहे हैं। छदाम शब्द पुलिंग की तरह हिन्दी में प्रयोग होता है। जेब में कुल ले दे के एक छदाम था वह भी कहीं गिर गया। ऐसा कहते हैं। उर्दू मे हो सकता है स्त्रीलिंग हो। 

Comment by Ajay Tiwari on December 23, 2017 at 5:18pm

आदरणीय अफ़रोज़ साहब,

मैंने 'छदाम' के हिंदी में पुलिंग होने की बात कही थी उर्दू में नहीं. कई शब्द ऐसे हैं जिनका हिंदी और उर्दू में अलग-अलग लिंगों में इस्तेमाल होता है. जैसे चर्चा हिंदी में होती है उर्दू में होता है. 

सादर  

Comment by Afroz 'sahr' on December 21, 2017 at 12:24am

आदरणीय अजय तिवारी जी "हिंदी शब्द सागर" और "मानक हिंदी कोष"के हवाले से आपने प्रुव किया है। कि लफ़्ज़ "छदाम" पुल्लिंग है। इसी तरह बहुत ही मारूफ़ ओ मोतबर शब्द कोष "फ़िरोज़ उल लुगा़त" नवीन एडिशन  "2011" के पेज क्रमांक '552' पर लफ़्ज़  "छदाम" मुअन्नस अर्थात स्त्रीलिंग अंकित है। देखिएगा सादर,,,

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on December 20, 2017 at 8:21pm

आदर्णीय लक्ष्मण धामी जी ग़ज़ल पसन्दगी के लिये सादर आभार

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 20, 2017 at 7:23pm

आ. भाई रामअवध जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Ajay Tiwari on December 20, 2017 at 12:54pm

आदरणीय अफ़रोज़ साहब,

'हिंदी शब्दसागर' और 'मानक हिंदी कोश' दोनों  के अनुसार 'छदाम' पुलिंग ही है. (देखें : हिंदी शब्दसागर - भाग -3 पृष्ठ-1615. 'मानक हिंदी कोश' भाग-2 पृष्ठ-297)  

हिदी विश्विद्यालय के 'वर्धा हिंदी कोश' के अनुसार भी यह पुलिंग ही है. यह कोश ऑनलाइन भी उपलब्ध है :

http://www.hindisamay.com/content/3159/19/-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4... 

सादर 

Comment by Afroz 'sahr' on December 20, 2017 at 9:56am

आदरणीय अजय तिवारी साहिब आदाब लफ़्ज़ "छदाम" हिंदी में मुअन्नस अर्थात स्त्रीलिंग होता है। जिसे हिंदी में "दमड़ी" भी कहा जाता है। जो कि पैसे का चौथा हिस्सा/चौथाई होता है।

लफ़्ज़ "दमड़ी" भी लफ़्ज़ "छदाम" की भाँति मुअन्नस अर्थात स्त्रीलिंग होता है।,,,सादर

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on December 20, 2017 at 6:43am

आदर्णीय सतविन्द्र कुमार जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 19, 2017 at 10:17pm

आदरणीय राम अवध जी हार्दिक बधाई स्वीकारें उम्दा गजल के लिए 

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on December 19, 2017 at 7:58pm

आदर्णीय अजय तिवारी जी आपके द्वारा की गई सटीक टिप्पणी एवं हौसला बढ़ाने के लिये आपका बहुत बहुत आभार

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service