For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा

212 1222 212 1222

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं

रात - रात भर तेरा इंतज़ार करते हैं

-

तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैं

जाँ निसार करते थे जाँ निसार करते हैं

-

ख़ुश रहे हमेशा तू हर ख़ुशी मुबारक हो

ये दुआ खुदा से हम बार - बार करते हैं

-

उँगलियाँ उठाते हैं लोग दोस्तों पर भी

हम तो दुश्मनों पर भी ऐतबार करते हैं

-

वादा उसका सच्चा है लौट के वो आएगा

इस उमीद पर अब भी इंतज़ार करते हैं

-

हम तो जान दे देते उनके इक इशारे पर

आशिक़ों में वो हमको कब शुमार करते हैं

-

फूल सा खिला चेहरा आँख वो ग़ज़ालों सी

मेरे ख़्वाब में आकर बेकरार करते हैं

---

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 122

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SALIM RAZA REWA on November 22, 2017 at 10:05pm
अली जनाब तस्दीक साहब,
आपकी महब्बत के लिए शुक्रिया, मशविरे के लिए शुक्रिया, सिर्फ टाइपिंग की गलती है..और कुछ नहीं, उमीद लिखा ही गया था आटो करेक्शन की वज़ह से..उम्मीद ले लिया,(तवक़्क़ो भी ) अच्छा लफ्ज़ है,
Comment by SALIM RAZA REWA on November 22, 2017 at 9:46pm
शुक्रिया जनाब आरिफ साहब.
Comment by SALIM RAZA REWA on November 22, 2017 at 9:46pm
आली जनाब समर साहब,
ग़ज़ल पे आपकी शिरक़त और मशविरे के लिए शुक्रिया,
जनाब 'में' टाइप नहीं हुआ है, उम्मीद को उमीद ही पढ़ें ,
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 22, 2017 at 5:36pm
जनाब सलीम रज़ा साहिब ,उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । शेर 5और6 का सानी मिसरा बह्र में नहीं आ रहा है ,मुनासिब समझें तो यूँ कर सकते हैं ।
(हम इसी तवक़्क़ो पर इनतजार करते हैं ),(आशिक़ों में वो हमको कब शुमार करते हैं )
Comment by Mohammed Arif on November 22, 2017 at 4:45pm
आदरणीय सलीम रज़ा साहब आदाब,
बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । हर शे'र माक़ूल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की बातों का संज्ञान लें ।
Comment by Samar kabeer on November 22, 2017 at 12:45pm
जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

'इस उम्मीद पर अब भी इन्तिज़ार करते हैं'
इस मिसरे में लय बाधित हो रही है,'उम्मीद' को "उमीद"कर लें ।
'दोस्तों वो हमको कब शुमार करते हैं'
ये मिसरा बह्र से ख़ारिज हो रहा है,इसे यूँ कर लें :-
'दोस्तों में वो हमको कब शुमार करते हैं'
आख़री शैर के कथ्य पर थोड़ा विचार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post आस्था "
"बेहतरीन तालीम/सबक़/प्रेरणा युक्त सृजन हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय प्रदीप देवीशरण भट्ट साहिब। कृपया…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sushil Sarna's blog post नए आयाम ....
"बहुत सुंदर और विचारोत्तेजक/प्रेरक सृजन हेतु सादर हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना साहिब।"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'कौन बदल रहा है?' (लघुकथा)
"मेरी इस ब्लॉग पोस्ट पर समय देकर अपनी राय से वाक़िफ़ कराते हुए मेरी यूं हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"मेरे उपरोक्त पुनर्अभ्यास अनुमोदन और मिसरों के प्रतिस्थापन हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम…"
4 hours ago
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post ग़ज़ल
"जनाब सतविन्द्र कुमार राणा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । आपने ओबी ओ के गोल्डन…"
8 hours ago
Shlesh Chandrakar replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आ. राणा प्रताप जी, ग़ज़ल संख्या 85 के 4थे शेर मिसरा ए उला सुधार कर ‛अब तेरा इंतजार करता हूँ'…"
11 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

नए आयाम ....

नए आयाम ....मुझे नहीं सुननी कोई आवाज़ मैंने अपने अन्तस् से हर आवाज़ के साथ जुड़े हुए अपनेपन की अनुभूति…See More
12 hours ago
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

आस्था "

हर घर में एक राम है रहता।हर घर में एक रावण भी॥जैसी जिसकी सोच है रहती।उसको दिखता वो वैसा ही॥ टूट…See More
12 hours ago
Mahendra Kumar replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"गोल्डन जुबली मुशायरा (अंक-100) के सफल संचालन एवं तीव्र संकलन की हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय…"
13 hours ago
Samar kabeer replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"जनाब अफ़रोज़ साहिबअदाब,तक़ाबुल-ए-रदीफ़ वाले मिसरे दुरुस्त कर लें ।"
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय कृष्ण सिंह जी वांछित संशोधन कर दिया है|"
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीया अंजलि जी वांछित संशोधन कर दिया गया है|"
14 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service