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बेहाल जिन्दगी

बिखरे सूखे पत्तों के बीच
फूस की झोपड़ी में
बेहाल जिन्दगी
अटकी साँसे
दुहाई दे रही थीं
सिर्फ जीने के लिए
दूर स्थित खेत में
कुछ काले श्वान
दूषित मटमैले
चेहरों पर भौंक रहे थे
बार बार गूँजती आवाज
सहमा डरा चेहरा
बहुत निराश
कम्पित भयावहता के बीच
कुछ टूटे फूटे बर्तन
बिखरे पड़े इधर उधर
बहते अश्रुओं के बीच
कोस रहे थे
अपनी बदनसीबी पर
निरीह आँखे निहार रही थी
ऊँचे मुंडेर पर
अट्टालिकाओं की नींव में
स्वेद बहाने वाला अभावग्रस्त
एक अदना सा आदमी
जिंदगी और मौत के बीच
एक-एक दाने को मुहाल
सूखती अतड़ियाँ
किसी के सेवार्थ
दफ़न होती जिंदगी
सुदूर आसमान में
भौतिक कोलाहल के बीच
वही बिखरे पत्ते
फटी कथरी
टूटे फूटे बर्तन
रह रह कर भौंकते श्वान
छटपटाती आत्मा की आँखे
सिर्फ न्याय के लिए

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 755

Comment

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Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 1, 2017 at 6:36pm
भाई सुरेन्द्र जी आपके उत्साह वर्धन से मन प्रसन्न हुआ आपको बहुत बहुत धन्यवाद
Comment by vijay nikore on November 1, 2017 at 4:57pm

बहुत ही सुन्दर रचना। हार्दिक बधाई।

Comment by TEJ VEER SINGH on November 1, 2017 at 1:48pm

हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ छोटे लाल सिंह जी।बेहतरीन कविता।

Comment by नाथ सोनांचली on November 1, 2017 at 8:45am
आद0 भैया डॉ छोटेलाल सिंह जी सादर अभिवादन, बढ़िया अतुकांत लिखी आपने, इस प्रस्तुति पर मेरी अनन्त बधाइयाँ निवेदित है।
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 31, 2017 at 8:18pm
आप सभी विद्वानों के उत्साहवर्धन से मन प्रसन्न हुआ आगे से पूरी कोशिश करेंगे रचना में कसाव के लिये ,आप सभी को शत शत नमन
Comment by Sushil Sarna on October 31, 2017 at 7:58pm

भौतिक कोलाहल के बीच
वही बिखरे पत्ते
फटी कथरी
टूटे फूटे बर्तन
रह रह कर भौंकते श्वान
छटपटाती आत्मा की आँखे
सिर्फ न्याय के लिए

वाह बेहद सजीव चित्रण वस्तु स्थिति का ... मार्मिकता भावों को साकार कर रही है .. इस श्रेष्ठ रचना के लिए हार्दिक हार्दिक बधाई आदरणीय।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 31, 2017 at 7:25pm
आदरणीय पहली बार आपसे रूबरू होने का मौका मिला गरीब और गरीबी का चित्रण मार्मिक लगा शिल्प का जानकार नहीं हूँ लेकिन रचना में कसाव की कमी लगी यह मेरी अपनी समझ भी हो सकती है रचना पर हार्दिक बधाई सादर
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 31, 2017 at 6:42pm
बहुत बढ़िया मार्मिक चित्रण, विचारोत्तेजक अंतिम पंक्ति। हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. छोटे लाल सिंह जी।

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