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ये जो इंसान आज वाले हैं (एक ही रदीफ़ पर दो गज़लें ---'राज')

2122  1212  22

(१)

 ये जो इंसान आज वाले हैं

कुछ अलग ही मिजाज वाले हैं

 

रास्तों पर अलग अलग चलते  

एक ही ये समाज वाले हैं

 

दस्तख़त से बनें मिटें रिश्तें   

कागजी ये रिवाज वाले हैं

 

रावणों की मदद करें गुपचुप

लोग ये रामराज वाले हैं

 

रोज खबरों में हो रहे उरियाँ

ये बड़े लोकलाज वाले हैं

 

मुंह छुपाते विदेश में जाकर  

जो  बड़े कामकाज वाले हैं

 

भूख होती है क्या वो क्या जानें   

वो जो  मोटे अनाज वाले हैं

 

 

(२ )

 

काम तो चालबाज़  वाले हैं

नाम  उनके फ़राज़ वाले हैं

 

आज फलफूलते वही रस्ते

वो भले  एतराज़  वाले हैं

 

अब परस्तार भी बटे देखो

ये भजन ये नमाज़  वाले हैं

 

कश्तियों को न रास्ता देते

ये जो चौड़े जहाज़  वाले हैं

 

कारनामे छपें सदा जिनके

वो कहें हम लिहाज़ वाले हैं 

 

देश भर में अलापते फिरते

खोखले वो जो साज़ वाले हैं

 

काम  यकदम करें भला कैसे  

उनके ओहदे तो नाज़ वाले हैं

मौलिक एवं अप्रकाशित  

Views: 170

Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 16, 2017 at 7:05pm

प्रिय कल्पना भट्ट जी ,आपको गज़लें पसंद आई मेरा लेखन सार्थक हो गया दिल से बहुत बहुत आभार |

Comment by KALPANA BHATT on August 15, 2017 at 11:09pm

दोनों ग़ज़ल लाजवाब है आदरणीया राजेश दी \ हार्दिक बधाई |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 14, 2017 at 5:30pm

आद० आशीष श्रीवास्तव जी ,आपको गज़लें पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 14, 2017 at 5:29pm

आद० गुरप्रीत सिंह जी ,आपको गज़लें पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से बहुत बहुत शुक्रिया|


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 14, 2017 at 5:29pm

आद० नीरज कुमार जी,आपको गज़लें पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से बहुत बहुत शुक्रिया| 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 14, 2017 at 5:28pm

आद० सुनंदा झा जी ,आपको गज़लें पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Ashish shrivastava on August 14, 2017 at 12:43pm
दोनों ग़ज़लें ज़ोरदार हैं , आदरणीया ।
Comment by Gurpreet Singh on August 14, 2017 at 12:15pm

दोनों ही ग़ज़लें बहुत अच्छी हुई है आदरणीया राजेश कुमारी जी,,, आपको बहुत बहुत बधाई 

Comment by Niraj Kumar on August 13, 2017 at 5:51pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी,

दोनों ग़ज़लें खूबसूरत हैं. दाद के साथ मुबारकबाद.

सादर

Comment by sunanda jha on August 13, 2017 at 2:16pm
वाहहहहह आदरणीया 'राज'जी बहुत प्यारी ग़ज़ल कही आपने ,हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर ।

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