For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले )

(फऊलन -फऊलन -फऊलन -फऊलन)

मेरे प्यार का शम्स ढलने से पहले |
कोई आ गया दम निकलने से पहले |

बहुत होगी रुसवाई यह सोच लेना
रहे इश्क़ में साथ चलने से पहले |

तेरे ही चमन के हैं यह फूल माली
कहाँ तू ने सोचा मसलने से पहले|

कहे सच हर इक आइना सोच लेना
बुढ़ापे में इसको बदलने से पहले |

ख़यालों में आ जाओ कटती नहीं शब
मिले चैन दिल को मचलने से पहले |

अज़ल से है उल्फ़त का दुश्मन ज़माना
लगाए यह ठोकर संभलने से पहले |

है शतरंज का खेल तस्दीक़ उल्फ़त
न दिल की तू सुन चाल चलने से पहले |

(मौलिक व अप्रकाशित )

Views: 340

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 17, 2017 at 10:42pm
जनाब नरेन्द्र चौहान साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by narendrasinh chauhan on August 16, 2017 at 12:26pm

बहुत ही उम्दा गज़ल...

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 14, 2017 at 10:59am
मुहतर्मा राजेश कुमारी साहिबा, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।---उर्दू में शब्द यह ही होता है ,ये नहीं ,इसलिए इसे इस्तेमाल किया है -----
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 14, 2017 at 10:56am
जनाब आशीष साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया। जनाब ,ये और यह का मिसरे में मतलब एक ही है -----

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 14, 2017 at 9:08am

मोहतरम जनाब तस्दीक जी ,बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई दिल से मुबारकबाद कुबूलें पोस्ट पर देरी से पंहुचने का खेद है आशीष श्रीवास्तव जी की बात से सहमत हूँ यह को ये कर लें |

Comment by Ashish shrivastava on August 13, 2017 at 9:57pm
मोहतरम तस्दीक़ साहब , बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है । मुबारकबाद ।
'तेरे ही चमन के हैं यह फूल माली '
इस मिसरे में फूल बहुवचन में हैं । अत: 'यह' की जगह 'ये' उपयुक्त होगा ।
Comment by surender insan on August 8, 2017 at 2:26pm
जी बेहद शुक्रिया जी आपका आदरणीय अब समझ आ गया जी। बहुत बहुत आभार जी। सादर नमन जी।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 6, 2017 at 12:17pm
जनाब सुरेन्द्र इंसान साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ।
रह और इश्क़ शब्दों में इज़फत लगाकर रहे इश्क़ बना है जिसका मतलब इश्क़ की राह होता है । रह का मतलब भी राह है ,शायद अब समझ में आ गया होगा ----
Comment by surender insan on August 6, 2017 at 9:02am
मोहतरम तस्दीक अहमद खान साहब आदाब। सभी अशआर बेहद उम्दा हुए है जी। शेर दर शेर दिली मुबारक़ बाद कबूल करे जी।
मोहतरम एक मिसरा मुझे समझ नहीं आया। इस पर थोड़ा मेहरबानी कर बताये जी।।

रहे इश्क़ में साथ चलने से पहले

बार बार पढ़ा तो यूँ हो सकता है समझ आया
राह-ए-इश्क़ में साथ चलने से पहले।
क्या राह-ए को रहे कहा गया है या रहे इश्क़ इस तरह से ही मिसरा कहा गया है
जो आपने कहा है उस पर थोड़ा मदद करे जी समझने में। सादर जी।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on July 25, 2017 at 8:00am
मुहतरम जनाब विजय साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"सिर्फ कहो तो पल भर में ही, बन जाऊं हज्जाम। बाजूजी आओ मैं कर दूँ, आज तुम्हारे काम।   काम कठिन…"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to मिथिलेश वामनकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85 में प्रस्तुत समस्त रचनाएँ
"धन्यवाद आपका "
2 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत ख़ूब! बहुत ख़ूब! बहुत ही सूक्ष्म चित्र निरीक्षम और सरस निरूपण । हार्दिक बधाई आदरणीय छोटे लाल जी ।"
3 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय प्रदीप जी.."
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई छोटेलालजी गरीब ग्रामीण युवती की महिमा में चित्र अनुरूप सुंदर सरसी छंद । हार्दिक बधाई"
3 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय बासुदेव भाईजी बड़ी खूबसूरती से आपने क्षेत्रीय शब्दों का प्रयोग कर चित्र अनुरूप  कामरूप…"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई छोटेलालजी रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार।"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय बासुदेव भाईजी रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार। आपका कहन सही है"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविंद्र भाई रचना की प्रशंसा के लिए हृदय से धन्यवाद, आभार। खाना बना दी, खिला दी, का प्रयोग…"
4 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (नाज़ कब वो भी उठा पाते हैं दीवाने का )
"जनाब अभिनव साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया"
4 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"मुहतरम जनाब बासुदेव साहिब ,प्रदत्त चित्र के अनुरूप सुन्दर कामरूप छन्द हुए हैं, मुबारकबाद क़ुबूल…"
5 hours ago
रामबली गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 79 in the group चित्र से काव्य तक
"स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी"
5 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service