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ग़ज़ल इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह)

2122 -1212 -22


आस दिल में दबी रही होगी
और फिर ख़्वाब बन गई होगी।

टूट जाए सभी का दिल या रब
दिलजले को बड़ी ख़ुशी होगी।

ज़ह्न हारा हुआ सा बैठा है
दिल से तक़रार हो गई होगी।

जिसकी खातिर लुटा दी जान उसने
चीज़ वो भी तो कीमती होगी।

जब मुड़ा तेरी ओर परवाना
शमअ बेइन्तहा जली होगी।

(मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment by Gurpreet Singh jammu on July 11, 2017 at 8:57pm
सतकारयोग सुशील सरना जी...तुहानू कोशिश पसंद आई..सानू तसल्ल्ली होई ..बहुत बहुत धन्नवाद
Comment by Gurpreet Singh jammu on July 11, 2017 at 8:51pm
बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 11, 2017 at 8:45pm

वाह वाह ------ मुझे तो कोई  कमी नहीं लगी .गुनीजन अपना  मत  दें . सादर .

Comment by Samar kabeer on July 11, 2017 at 6:49pm
जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
एक निवेदन ये है कि कृपया मंच को अपनी सक्रियता से लाभान्वित करें,ये हमारी ज़िम्मेदारी है ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 11, 2017 at 3:37pm
आदरणीय खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई
Comment by Ravi Shukla on July 11, 2017 at 2:20pm

आदरणीय गुरप्रीत जी छोटी बहर में अच्‍छे शेर निकाले आपने।गजल के मुकाबले मतला थोड़ा और बेहतर हो सकता है। दूसरे शेर में अच्‍छा अंदाज  है बददुआ देने का :-) मुबारक बाद पेश है । सादर

Comment by Sushil Sarna on July 11, 2017 at 2:16pm

आस दिल में दबी रही होगी
और फिर ख़्वाब बन गई होगी।

वाह आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी बहुत सुंदर अशआर कहे हैं आपने। ऐनी सोणी ग़ज़ल वास्ते तुहानू लख लख वधाईयां।

Comment by Mohammed Arif on July 11, 2017 at 2:09pm
आदरणीय गुरप्रीत जी आदाब,छोटी बह्र की प्यारी सी ग़ज़ल । हर शे'र बेतरीन , लाजवाब है । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । गुणीजन इस्लाह करेंगे । इंतज़ार करें ।

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