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ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है

कश्मीर के हालातों को लेकर मन की उपज
122 122 122 122
दवा काम आये न लगती दुआ है
जहर से भरी वादियों में हवा है

यहाँ आदमी मुख़्तलिफ़ है खुदी से
न मुददा है कोई न ही माज़रा है

रुको मत लहू आखरी तक निचोड़ो
अभी जिस्म में जान बाकी जरा है

कहीं उड़ न जाये वफ़ा का परिंदा
अभी और मारो अभी अधमरा है

सरे राह घर है औ धरती बिछौना
भला मुफलिसों की जरुरत भी क्या है
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Comment by Sushil Sarna on April 24, 2017 at 2:17pm

आदरणीय बृजेश जी सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई। 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 24, 2017 at 12:09pm
आदरणीय समर सर आपकी उपाथिति सदैव ही मनोबल बढ़ाने वाली होती है...बारीक़ से बारीक़ इस्लाह देने के लिए में सदैव ही आपका कायल हूँ..अभी सुधार करता हूँ..सादर
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 24, 2017 at 12:05pm
आदरणीय नीलेश जी आपकी बात सर्वथा उचित है..देश के हालात थोड़े नाजुक हैं लेकिन वो अंदरुनी राजनीति का परिणाम है..कश्मीर के हालात बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप के कारण.. ख़राब हैं इसलिए ज्यादा चिंताजनक है..रचना पटल पे आपकी उपस्थिति उत्साहवर्धक है..हार्दिक आभार सादर
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 24, 2017 at 12:02pm
आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी..आपकी उताहवर्धक टिप्पड़ी मनोबल बढ़ाने वाली है..आपका हार्दिक हार्दिक धन्यवाद सादर
Comment by Samar kabeer on April 24, 2017 at 10:33am
हेडिंग में 'हालातों'शब्द ग़लत है,हालत का बहुवचन 'हालात'है ।
Comment by Samar kabeer on April 24, 2017 at 10:30am
जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज'साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल है, बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 24, 2017 at 9:13am

सिर्फ कश्मीर क्यूँ... पूरे देश में कमोबेश यही हालात है ..
ग़ज़ल के लिये बधाई 

Comment by Mohammed Arif on April 23, 2017 at 10:23pm
दवा काम आये न लगती दुआ है
जहर से भरी वादियों में हवा है । वाह!वाह!! बहुत ख़ूब ।
सरे राह घर है औ धरती बिछौना
भला मुफलिसों की जरुरत भी । वाह!वाह!! सच है ।
शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल. करें आदरणीय बृजेश कुमार जी ।

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