For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कई पेड़ों की तरह वह भी एक पेड़ था
शब्दों के खांचों से दूर.............

छुटपन में कभी कोई गुठली फेंक दिया था
प्रकृति ने अपना काम शुरू किया था

समय गुज़रा लाल कोंपल था दिखा
ख़ुशी हुई बच्चे ने बच्चे को देखा

एक पेड़ जो मुझे जन्म से देख रहा था
एक पेड़ जिसको जन्म से मैं देख रहा था

एक अनजान दरख़्त
एक थोड़ा जाना पहचाना ........

मेरे दुआर का पेड़ मेरी ऊँचाई लाँघ गया
ख़ुशी ख़ुशी मैं उसके कंधों पर भाग गया

बहुत से जीव मेरे साथ वहाँ थे आते
हँसते कूदते..कभी मुझे काट जाते

परन्तु मुझे जन्म से जो पेड़ देख रहा था
वह खांचों में आ गया था

उसे भी सभी द्वारा
आम का पेड़ कहा गया था.....

समय ने करवट ली वह मेरे रूबरू हुआ
वह तो खुश था उससे ज्यादा मैं हुआ

समय न होते हुए भी कुछ तो था...

हवाएं गर्म होते हुए भी मखमली थीं
ख्यालों में अब नरमी थी

जाने क्या थी वह अनुभूति....
कौन थी बात सच्ची कौन थी झूठी

अनजान ऊर्जा प्राप्त होती रही
काल की धारा बहती रही

एक दौर रीता .....
एक दौर बीता ...

जीवन ने रंग बदला बरसात आ गई
नए पत्तों से हरियाली छा गयी

फिर से समय स्याह हुआ...

दरख्त सब देख चुका था
अपनी सांसें रोक चुका था

बहुत मीठे आम थे उसके...

हम फल के लिए ही भागते हैं
ढोल पीटकर ही कुछ त्यागते हैं

आज उसकी सूखी देह है मेरे सामने
इस मोड़ पर नहीं जाता है उसे कोई थामने....

मेरे दुआर का पेड़ मेरे ऊपर हँसता है
कहता है...

अगर हम भी फल साधने लगें
तो ये फल हमें बाँधने लगे

तू क्यों उदास होता है
क्यों विचारों का दास होता है

यही तो जीवन है...
किसी का जन्म
किसी का मरण है

कोई पास आता है
कोई भाग जाता है

कोई पटरी पर चलता है
.........कोई सत्य टटोलता है

यह कह कर वह...

मुझे गले लगा लेता है
हर पल हर हालात में खुश रहता है..........


-------मौलिक और अप्रकाशित---------

Views: 533

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by ASHUTOSH JHA on April 13, 2017 at 10:32pm
आदरणीय महेंद्र कुमार जी।आपका बहुत बहुत आभार।
Comment by Mahendra Kumar on April 13, 2017 at 7:54pm
बढ़िया कविता है आदरणीय आशुतोष जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।
Comment by ASHUTOSH JHA on April 13, 2017 at 2:42pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी,नमस्कार।
आपकी बधाइयों के लिए हार्दिक आभार ।
Comment by ASHUTOSH JHA on April 13, 2017 at 2:37pm
आदरणीय समर कबीर जी,नमस्कार।आपके द्वारा की गई हौसला अफज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।
Comment by ASHUTOSH JHA on April 13, 2017 at 2:33pm
आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी,नमस्कार।आपके प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 12, 2017 at 8:58pm

आदरणीय आशुतोष भाई , अच्छी कविता रची है आपने .... बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by Samar kabeer on April 10, 2017 at 6:13pm
जनाब आशुतोष झा साहिब आदाब,बहुत सुंदर वैचारिक कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on April 10, 2017 at 12:49pm
आदरणीय आशुतोष झा जी आदाब,बेहतरीन पर्यावरणीय रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
18 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
yesterday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service