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अशफाक-मंगल औ भगत को मत भुलाना तुम ( बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’)

अरकान-  1222  1222  1222  1222 

 

मुहब्बत में सनम हरदम न मुझको आजमाना तुम|

अकेलापन सताता है कि वापस आ भी जाना तुम|

 

मुहब्बत खेल है बच्चों का शायद तुम समझते हो,

अगर घुट-घुट के मरना है तो फिर दिल को लगाना तुम,

 

वतन के नाम कर देना जवानी-ऐशोइशरत औ

कटा देना ये सर अपना मगर सर मत झुकाना तुम|

 

कफस में डाल के दुश्मन को मौका और मत देना ,

उड़ा के सर ही दुश्मन का धरम अपना निभाना तुम|

 

मुहब्बत धार है तलवार की चलना संभल के दोस्त,

नसीहत मान बस मेरी कि दिल को मत लगाना तुम,

 

भले ही याद मत करना कभी बापू व नेहरू को,

मगर अशफाक-मंगल औ भगत को मत भुलाना तुम|

 

अगर औलाद भी तेरा वतन गद्दार हो जाए,

मिटा देना उसे ‘मिंटू’ नही रिश्ता निभाना तुम|

 

 

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 28, 2017 at 10:29pm
अच्छी ग़ज़ल हुई..हार्दिक बधाई
Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on March 26, 2017 at 7:19pm

आदरणीय आरिफ़ साहेब  ....हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम 

Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on March 26, 2017 at 7:18pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी ....हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Mohammed Arif on March 24, 2017 at 10:32pm
आदरणीय बृजनाथ जी आदाब,देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई ।
Comment by नाथ सोनांचली on March 24, 2017 at 4:14pm
आदरणीय बृजनाथ शर्मा जी सादर अभिवादन, बहुत उम्दा देशभक्ति से ओतप्रोत ग़ज़ल, के लिए बधाई।

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