For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल( आज तुम यह क्या किये बैठे हुए हो)

 2122  2122  2122 

आज तुम यह क्या किये बैठे हुए हो
बेवजह का गम लिये बैठे हुए हो।1

कौन सुनता है यहाँ कुछ बात ढब की
दिल नसीहत को दिये बैठे हुए हो।2

और होता मौन का मतलब यहाँ पर
क्या पता क्यूँ मुँह सिये बैठे हुए हो।3

बदगुमानों की यहाँ बल्ले हुई बस
आशिकी का भ्रम जिये बैठे हुए हो।4

एक से बढ़ एक नगमे बुन रहे सब
तुम  पुरानी धुन लिये बैठे हुए हो।5

काफिले बढ़ते गये सब साथियों के
तुम यहाँ किसके लिये बैठे हुए हो।6

माँगना पड़ता यहाँ कुछ बोलकर
क्यूँ 'मनन' सब तोलकर बैठे हुए हो।7
मौलिक व अप्रकाशित @मनन


Views: 858

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on January 30, 2017 at 3:33pm
एक मिसरा देखिये :-
"सब अँधेरों से कोई वादा किये बैठे हैं"
अब इस मिसरे को यूँ कहें तो:-
सब अँधेरों से कोई वादा किये हुए बैठे हैं",तो इसमें 'हुए' शब्द भर्ती का हुआ न, बस मैं इतना ही निवेदन करना चाहता हूँ ।
Comment by Manan Kumar singh on January 29, 2017 at 9:03pm

आदरणीय समर जी नमस्ते। आपका कहना वाजिब है। पढ़ा और पढ़ा हुआ/ हुए प्रयोग में तो पाये ही जाते हैं न। जैसे कि पढ़ा पाठ या पढ़ा हुआ पाठ। पढे लोग या पढ़े हुए लोग। वैसे आपकी इस्लाह काबिले गौर होती है और हमलोग बहुत कुछ सीखते हैं,सादर। 

Comment by Samar kabeer on January 29, 2017 at 7:07pm
जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल है बधाई आपको ।
रदीफ़ में 'हुए'शब्द की क्या ज़रूरत जबकि 'बैठे हो'में ही बात पूरी हो जाती है ?
Comment by Manan Kumar singh on January 29, 2017 at 5:22pm

आदरणीय कालीपद जी, शेर की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ, सादर। 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on January 29, 2017 at 3:53pm

आ मनन कुमार जी ,आपका मतला बहुत सुन्दर  लगा मुझे हार्दिक बधाई | 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on January 29, 2017 at 3:53pm

आ मनन कुमार जी ,आपका मतला बहुत सुन्दर  लगा मुझे हार्दिक बधाई | 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"एक सप्ताह के लिए सभी चार आयोजन के द्वार खुल गए। अच्छी बात ये है कि यह एक प्रयोग है ..... लेकिन…"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ++++++++   ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं…"
6 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें दिल अभी जाना नहीं कि तुझ से कहें ग़म…"
10 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सादर अभिवादन "
10 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी की नमस्कार, यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है,…"
13 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"स्वागतम"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें…"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात…See More
Monday
amita tiwari posted blog posts
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service