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मेरे कानों में मुहब्बत फुसफुसाया कौन था (ग़ज़ल 'राज ')

2122  2122  2122  212

किसने  होंटों पे तबस्सुम को  सजाया कौन था

छुप के दिल में वस्ल का दीपक जलाया कौन था

 

साँसे मेरी जीस्त मेरी मेरा अपना था वजूद

धडकनों पे मेरी जिसने हक जमाया कौन था

 

जब कभी भीगी तख़य्युल में कहीं पलकें मेरी

शबनमी उन  झालरों से मुस्कुराया कौन था

 

गुफ्तगू के उस सलीके पर मेरा तन मन निसार

बातों बातों में मुझे अपना बनाया  कौन था

 

जब तेरी फ़ुर्कत में  भीगा था मेरा तकिया कभी  

सुब्ह को फिर धूप बन जिसने सुखाया कौन था

  

जब जमाने ने उगाये ख़ार मेरी राह  में

तोड़कर महताब कदमों में बिछाया कौन था

 

जी रही थी तल्खियों के साथ जब ये जिन्दगी

मेरे कानों में मुहब्बत फुसफुसाया  कौन था

----------मौलिक एवं अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 17, 2017 at 9:27pm

आद० बृजेश  कुमार बृज जी,आपका तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया . 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 17, 2017 at 9:26pm

मुह्तरम मोहम्मद आरिफ़ जी आपका तहे दिल से शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 17, 2017 at 9:25pm

आद० सुरेन्द्र नाथ भाई जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई आपका बहुत बहुत शुक्रिया .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 17, 2017 at 9:24pm

आद० गिरिराज जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया आपका .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 17, 2017 at 8:02pm

आद० विजय निकोर जी ,आपकी इस प्रतिक्रिया ने मेरी ग़ज़ल को धन्य कर दिया इस होंसलाफ्जाई का तहे दिल से शुक्रिया .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 17, 2017 at 8:01pm

आद० समर भाई जी ,आपकी हर इस्स्लाह का मैं दिल से स्वागत करती हूँ .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 17, 2017 at 7:59pm

आद० मिथिलेश भैय्या ,आपको ग़ज़ल पसंद आई आपकी समीक्षा से अभिभूत हूँ मेरा लिखना सार्थक हुआ इस ग़ज़ल को दो नशिस्त में कह चुकी हूँ बहुत अच्छा रेस्पोंस मिलता है .आपकी दाद पाकर बहुत उत्साहित हूँ दिल से बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 12, 2017 at 8:57pm
अनुपम...बहुत ही सुन्दर..ढेरों बधाइयाँ
Comment by Mohammed Arif on January 12, 2017 at 2:53pm
आदरणीया राजेश कुमारीजी आदाब , बहुत अच्छी ग़ज़ल । जनाब समर साहब ने सबकुछ कह दिया है । ढेरों मुबारकबाद !
Comment by नाथ सोनांचली on January 11, 2017 at 9:56pm
आदर0 बहन राजेश कुमारी जी उम्दा ग़ज़ल के लिए दाद हाजिर है, समर साहब के चर्चा से हमे भी बहुत कुछ सीखने को मिला, आपको कोटिश बधाइयाँ निवेदित हैं। सादर

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