For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ताटंक छंद
---
1
बुरे समय का खेला चलता, गुण की कीमत जाती है
लोग बुरे आगे बढ़ते हैं,अच्छों की मत जाती है
मक्कारी के घर भरते हैं,सच्चाई घबराई है
जनता देखो भूखी मरती,कुत्ता खात मलाई है।
2.
बहा पसीना खेत कमाता, पोषण सबका होता है
खुद का बच्चा तड़प तड़प कर, भूखा घर में सोता है
कुदरत ने तो मारा उसको,करता तंत्र पिसाई है
जनता देखो भूखी मरती,कुत्ता खात मलाई है।

3
जो करते हैं काम अनेकों ,नाम कभी क्या होता है,
काट लफंगे खा जाते हैं,फसल और ही बोता है
पोश सफेद बना जो उसमें,देता चोर दिखाई है
जनता देखो भूखी मरती,कुत्ता खात मलाई है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 571

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 18, 2016 at 7:35am
आदरणीय गोपाल सर छ्न्द पर प्रयास आपको ठीक लगा।यह सार्थक हुआ।सादर हार्दिक आभार।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 17, 2016 at 8:32pm

आ० सतविंदर जी . छंद का निर्वाह बढ़िया हुआ है , बधाई

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 17, 2016 at 11:46am
प्रयास की सराहना के लिए सादर आभार सँग नमन आदरणीया कल्पना दीदी।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 17, 2016 at 11:45am
अनुमोदन एवं प्रयास की सराहना के लिए सादर हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब।सादर नमन
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 17, 2016 at 8:55am
बढ़िया छंद ।। हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर भैया
Comment by Samar kabeer on August 16, 2016 at 11:02pm
जनाब सतविंदर कुमार जी आदाब,बहुत अच्छे छंद लिखे हैं आपने,आपकी बात दिल को छू रही है ,इस शानदार प्रस्तुति के लिये दिल से बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
5 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"स्वागतम"
5 hours ago
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
5 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"स्वागतम"
5 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात…See More
yesterday
amita tiwari posted blog posts
yesterday
Admin replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक…"
Sunday
Admin posted discussions
Sunday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Sunday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ।  डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी…"
Friday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service