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सात जन्म दे जाए ...

सात जन्म दे जाए ...

मेघों का जल
कौन पी गया
कौन नीर बहाये
क्यूँ ऋतु बसंत में आखिर
पुष्प बगिया के मुरझाये
प्रेम भवन की नयन देहरी पर
क्यूँ अश्रु ठहर न पाए
विरह काल का निर्मम क्षण क्यूँ
धड़कन से बतियाये
वायु वेग से वातायन के
पट रह रह शोर मचाये
छलिया छवि उस बैरी की
घन के घूंघट से मुस्काये
वो छुअन एकान्त पलों की
देह भूल न पाये
तृषातुर अधरों से विरह की
तपिश सही न जाए
नयन घटों की व्याकुल तृप्ति
दूर खड़ी सकुचाये
गौर कपोल पे कुंतल-लट की
क्रीडा उधम मचाये
पी वियोग में अंजन रेखा
अंसुअन संग बही जाए
बाट जोहती अांखों की
बैरी व्यथा समझ न पाए
करूं समर्पण अपना सब कुछ
जो वो लौट के अाये
चुटकी भर सिंदूर से मुझको
सात जन्म दे जाए


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 481

Comment

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Comment by Sushil Sarna on July 3, 2016 at 1:17pm

अादरणीय शिज्जू शकूर साहिब प्रस्तुति पर अपकी ऊर्जावान प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by Sushil Sarna on July 3, 2016 at 1:16pm

अादरणीया कांता रॉय जी सृजन के भावों को अात्मीय मान देने का हार्दिक अाभार। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 3, 2016 at 7:08am
आ. सुशील सरना सर वियोग श्र्ंगार रस से परिपूर्ण अच्छी रचना बन पड़ी है। बधाई आपको
Comment by kanta roy on July 2, 2016 at 11:22pm

प्रेम भवन की नयन देहरी पर 
क्यूँ अश्रु ठहर न पाए 
विरह काल का निर्मम क्षण क्यूँ 
धड़कन से बतियाये ----- अद्भुत भाव ! 

पी वियोग में अंजन रेखा 
अंसुअन संग बही जाए 
बाट जोहती अांखों की 
बैरी व्यथा समझ न पाए---वाह ! वाह ! अप्रितम अभिव्यक्ति देखने  को  मिली  आपकी  फिर  से  आदरणीय  सुशिल  सरना  जी . बधाई  आपको .

Comment by Sushil Sarna on July 2, 2016 at 7:49pm

अादरणीय रक्ताले साहिब प्रस्तुति को अापनी अात्मीय प्रशंसा से मान देने का हार्दिक अाभार। अापके द्वारा इंगित संदेह को दुरुस्त कर पुनः प्रेषित कर रहा हूँ। अापके इस सुझाव का दिल अाभार। 

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 2, 2016 at 6:59pm

आदरणीय सुशील सरना साहब सादर नमन, विरह वियोग पर सुंदर रचना हुई है. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. फिरभी कुछ जगह देख लें.

किसने नीर बहाये.................यहाँ कौन नीर बहाए तो ठीक है किन्तु किसने.... देख लें.

नयन घटों 'पर' व्याकुल तृप्ति
'दूर' खड़ी सकुचाये......................यहाँ  'पर' या  'दूर' में से किसी एक को ही रखना उचित होगा. सादर. 

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