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2122-2122-212

                 ग़ज़ल   

इस तरह सब पे इनायत कीजिए

बोल कर मीठा इबादत कीजिए    

 

यूँ न दुनिया से बगावत कीजिए

दिल मिला सब से मुहब्बत कीजिए

 

चाँद छत पे आ गया तुम को नज़र

पेश अपनी अब शराफत कीजिए

 

नफरतें सारी ये मिटटी में मिलें

प्यार को ऐसी इमारत कीजिए

 

बोल भारत की जमीं तुमसे रही

माँ समझ कर कुछ तो इज्जत कीजिए 

मुनीश “तन्हा” नादौन 9882892447  (मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by बशर भारतीय on May 26, 2016 at 7:38am
आदरणीय मुनीश तन्हाजी बधाई इस ग़ज़ल के लिये
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 25, 2016 at 9:21pm

नफरतें सारी ये मिटटी में मिलें

प्यार को ऐसी इमारत कीजिए

 

बहुत खूब आदरणीय | 

Comment by Samar kabeer on May 25, 2016 at 3:01pm
जनाब मुनीश तन्हा साहिब आदाब,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Ravi Shukla on May 25, 2016 at 12:54pm

आदरणीय मुनीश जी बधाई स्‍वीकार करें गजल के लिये

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