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मज़दूर दिवस (लघुकथा)

 मज़दूर दिवस  – ( लघुकथा )  -

 कारखाने में  मज़दूर दिवस मनाया जा रहा था!  मंच पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में विराजमान थे! उनके दायीं ओर प्रदेश के मुख्य मंत्री और बायीं तरफ़ कारखाने के मालिक सेठ धनपति लाल मौज़ूद थे!

 कारखाने के  चुंनिंदा कामगारों  को सम्मानित किया जाना था! सर्वश्रेष्ठ कामगार का पुरुस्कार सुखराम को मिलना था! सेठ जी ने माइक पर जैसे ही संबोधित करना शुरू किया! तभी सेठ जी के सैक्रेटरी ने सेठ जी के कान में बताया  “आपके कार्यालय के ए सी को जांच करते समय सुखराम को विद्युत आघात लगा है! वह आपके कार्यालय में बेहोश पडा है”!

सेठ जी ने भी उसी तरह फ़ुसफ़ुसाकर उसे कहा  “उसे वहीं रखो और कुछ प्राथमिक उपचार दे दो! यह खबर गोपनीय रहनी चाहिये”!

कार्यक्रम का समापन  हो चुका था! कारखाने के मुख्य द्वार से नेताओं और  अतिथिओं का काफ़िला   निकल रहा था! सेठ जी  सभी को उपहार देकर विदा कर रहे थे!

उसी समय कारखाने के पिछले द्वार से कारखाने के सर्वश्रेष्ठ कामगार सुखराम की लाश उसके घर भिजवाई जा रही थी!

मौलिक व अप्रकाशित

 

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Comment by TEJ VEER SINGH on May 6, 2016 at 11:36am

हार्दिक आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी!

Comment by TEJ VEER SINGH on May 6, 2016 at 11:35am

हार्दिक आभार आदरणीय प्रतिभा पांडे जी!

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 5, 2016 at 3:58pm
आदरणीय --- कथा पर कुछ सटीक टिप्पणियां आयी हैं . मेरी जिज्ञासा यह है कि उस सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार का क्या हुआ और क्या बिना उसे वितरित किये ही सभा समाप्त कर दी गयी . कार्यक्रम का जो मुख्य भाग था वह पूरा ही नहीं हुआ --- बहरहाल कथा का विषय अत्यधिक संवेदनशील है , प्रभावित करता है . ट्रीटमेंट में कुछ श्रम और आवश्यक था .
Comment by pratibha pande on May 5, 2016 at 12:21pm

 मजदूर और किसान ,देश की रीढ़ की हड्डी और वो ही सबसे ज्यादा बेहाल ,क्या कहें इस तंत्र को ,हमेशा की तरह ज्वलंत विषय उठाया है आपने ,बधाई आपको आदरणीय तेजवीर सिंह जी 

Comment by TEJ VEER SINGH on May 5, 2016 at 10:51am

हार्दिक आभार आदरणीय राहिला आसिफ़ साहिबा जी!

Comment by Rahila on May 5, 2016 at 8:41am
शानदार लेखन आदरणीय तेजवीर सर जी! बहुत बधाई ।
Comment by TEJ VEER SINGH on May 3, 2016 at 7:41pm

हार्दिक आभार आदरणीय ओम प्रकाश जी!

Comment by Omprakash Kshatriya on May 3, 2016 at 5:13pm
अच्छे लोगों की चाहत ऊपर भी होती है. कहावत है- जिस की यहाँ चाहना, उस की वहां चाहना. बेहतर लघुकथा. अंत बड़ा मार्मिक है.
Comment by TEJ VEER SINGH on May 3, 2016 at 4:30pm

हार्दिक आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 3, 2016 at 4:27pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी, बहुत शानदार कथ्य है लेकिन लघुकथा तनिक कसावट चाहती है. गुणीजनों ने भी संकेत किया है. बहरहाल इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई. सादर 

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