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अभिनय की महता(लघुकथा)/सतविंदर कुमार

अपनी मांग को लेकर एक समुदाय के लोग शांति से आंदोलन कर रहे थे। अचानक आंदोलन ने उग्र रूप लिया। अन्य समुदायों से झड़पें हुई। मारा-मारी हुई। छोटी-बड़ी सड़कें बन्द। लूट-पाट शुरू। यह सब ऎसे चला की मारा-मारी में हुई झड़पों में कइयों की जानें भी गई।
एक पत्रकार मांग को लेकर आंदोलन कर रहे समुदाय के बड़े नेता से
-यह जो हो रहा है, क्या यह सब ठीक है?
-जब चारों तरफ आगजनी हो, मारा-मारी हो, सब अपने ही लोग अपनों को मारने पर तुले हों, जनता हालातों से तंग आ गई हो तो कुछ ठीक कहा जा सकता है? यह बहुत ही दुखद है। ऐसी स्थिती नहीं बननी चाहिए। मैं सबसे शान्ति बनाए रखने की हाथ जोड़ कर अपील करता हूँ।
-अपील के साथ-साथ आप उन लोगों के बीच में जाकर उन्हें समझाएंगे तो वे ज़रूर मानेंगे। आपने ऐसा कुछ सोचा है?
-हाँ कल से ही मैं राज्य में शांति स्थापना की कामना के लिए अनिश्चित कालीन उपवास शुरू करने वाला हूँ। ईश्वर जल्द ही सब ठीक करेंगे।
-मगर आप भी तो कुुछ.....।
-आप लोग ऐसी घड़ी में भी लोगों तक हमारा सन्देश पहुँचा रहे हैं बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। हमें उपवास  की तैयारी करनी है। नमस्कार।
नेताजी ने पत्रकार की बात काटकर बातचीत का समापन कर उसे विदा किया।

फोन पर


-अरे! उस **** के इलाके में तो पूरी शान्ति है। अपने बन्दों को लेकर जाओ वहां उपद्रव होगा तो ही अपना फायदा होगा। नेता बना फिरता है स्साला। बिठाओ प्रोग्राम। पता चले।


-पर थोड़ी देर पहले उस पत्रकार को तो शान्ति स्थापना करवाने के लिए... 
पास बैठे एक समर्थक ने संशय प्रकट करने की कोशिश की।

-अब इस बावले को क्या समझाऊँ कि नेतागिरी, अभिनेतागिरी बिना है ही क्या.।
बड़बड़ाते हुए नेताजी उसकी तरफ मुस्करा भर दिए।

मौलिक एवम् अप्रकाशित

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 2, 2019 at 9:22pm

बेहतरीन समापन पंक्तियों और शीर्षक के साथ हक़ीक़त का बढ़िया चित्रण। जन-जागरूकता हेतु, विचारोत्तेजक। हार्दिक बधाई आदरणीय सतविंदर कुमार राणा साहिब।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on February 24, 2016 at 7:31am
सादर नमन वन्दनीया कांता दीदी।आपकी उपस्थिति से रचनाकर्म सार्थक हुआ।बहुत बहुत हार्दिक आभार।
Comment by kanta roy on February 23, 2016 at 10:34pm
राजनीति में अभिनय कला का महत्व को साबित करती ,भोले प्रजा को गुमराह करती , विसंगतियों को बेहतरीन तरीके से रोपित किया है आपने आदरणीय सतविंदर जी । बधाई कबूल कीजियेगा ।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on February 23, 2016 at 3:06pm
प्रथम अनुमोदन एवम् प्रोत्साहक टिप्पणीकरने के लिए सादर हार्दिक आभार आदरणीया राहिला जी।सादर नमन
Comment by Rahila on February 23, 2016 at 11:34am
नेता, ही तो सबसे बड़े अभिनेता है । खामखां सिने कलाकारों को अभिनय पुरूस्कार दिया जाता है जबकि सही हकदार दे ये जनता के सेवक है । बहुत बधाई आदरणीय सर जी!बहुत उम्दा रचना प्रस्तुत की।सादर

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