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हमने किस किस से न पूछा/ ग़ज़ल

2122  2122   2122  212

हमने किस किस से न पूछा ज़िन्दगी तेरा पता ।
हमको ले आया ग़मों में ऐ ख़ुशी तेरा पता ।

ऐ मुहब्बत दूर मुझसे अब न तू जा पाएगी ,
दे रहा है अब मुझे ये दर्द भी तेरा पता ।

हाथों में  दीपक बुझा था दूर तारे थे बहुत ,
जुगनुओं से हमने पूछा रौशनी तेरा पता ।

माना ढलती उम्र में चाहत भी तेरी ढल गयी ,
ढूंढता है इक दीवाना आज भी तेरा पता ।

उनसे नज़रें क्या मिलीं दिल शायराना हो गया ,

आशिकी में मिल रहा है शाइरी तेरा पता ।

हमने माना राह दिल की बंदगी तुझसे मिली ,
पर लुटाकर जाँ मिला है बंदगी तेरा पता ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज मिश्रा

Views: 1065

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Comment by जयनित कुमार मेहता on January 17, 2016 at 10:59am
बहुत अच्छी व खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने, आदरणीय नीरज मिश्रा जी.. बधाई आपको!!
Comment by Neeraj Nishchal on January 15, 2016 at 4:52pm

बहुत बहुत शुक्रिया RAAM ASHERY साहब आपका

Comment by Neeraj Nishchal on January 15, 2016 at 4:51pm

बहुत बहुत शुक्रिया PHOOL SINGH साहब आपका

Comment by Neeraj Nishchal on January 15, 2016 at 4:50pm

नमस्कार समीर साहब बहुत बहुत आपका आपकी इस्लाह के लिए
क्षमा चाहता हूँ

माना ढलती उम्र में चाहत भी तेरी ढल गयी ,
ढूंढता है इक दीवाना आज भी तेरा पता ।

इसमें एक शब्द ढल शायद लिखना भूल गया था
अभी इसे सही करके पेश कर रहा हूँ ।

एक अन्य मिसरे में भी जल्दी में "से" लिखना भूल गया

जुगनुओं से हमने पूछा रौशनी तेरा पता ।

बहरहाल बहुत बहुत आभार आपका
आगे से अरकान ज़रूर लिखूंगा ।

Comment by Ram Ashery on January 15, 2016 at 3:20pm

बहुत ही सुंदर गजल आपको दिल बधाई स्वीकार हो । 

Comment by PHOOL SINGH on January 15, 2016 at 10:07am

बहुत ही सुन्दर, आप बहुत बहुत बधाई

Comment by Samar kabeer on January 14, 2016 at 10:42pm
जनाब नीरज मिश्रा "प्रेम" जी,आदाब,बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने ,बधाई स्वीकार करें ,ओबीओ के नियमानुसार ग़ज़ल पर उसके अरकान लिखना ज़रूरी है,आपने अरकान नहीं लिखे हैं,आइन्दा ख़याल रखियेगा ।
कुछ मिसरों की तरफ़ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा :-

1)"जुगनुओं हमने पूछा रौशनी तेरा पता"

:- यह मिसरा बह्र से ख़ारिज हो रहा है,इसे इस तरह लिखेंगे तो ये कमी दूर हो जाएगी :-

"जुगनुओं से हम ने पूछा रौशनी तेरी पता"

2)"माना ढलती उम्र में चाहत भी तेरी गयी"

:- यह मिसरा भी बह्र से ख़ारिज हो रहा है,इसे इस तरह लिखेंगे तो यह सही हो जाएगा :-

"माना ढलती उम्र में चाहत भी वो तेरी गई"

देख लीजियेगा,कृपया अन्यथा न लें ।

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