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हर बार उन्हें आप ने सुल्तान बनाया (ग़ज़ल)

बह्र : २२११ २२११ २२११ २२

 

ये झूठ है अल्लाह ने इंसान बनाया

सच ये है कि आदम ने ही भगवान बनाया

 

करनी है परश्तिश तो करो उनकी जिन्होंने

जीना यहाँ धरती पे है  आसान बनाया

 

जैसे वो चुनावों में हैं जनता को बनाते

पंडे ने तुम्हें वैसे ही जजमान बनाया

 

मज़लूम कहीं घोंट न दें रब की ही गर्दन

मुल्ला ने यही सोच के शैतान बनाया

 

सब आपके हाथों में है ये भ्रम नहीं टूटे

यह सोच के हुक्काम ने मतदान बनाया

 

हर बार वो नौकर का इलेक्शन ही लड़े पर

हर बार उन्हें आप ने सुल्तान बनाया

------------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 994

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Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 2, 2016 at 11:48am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय आशुतोष मिश्रा जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 2, 2016 at 11:46am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय बैजनाथ जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 2, 2016 at 11:46am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 2, 2016 at 11:45am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गुमनाम पिथौरागढ़ी जी

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 26, 2015 at 7:25pm

आदरणीय धर्मेन्द्र जी इस शानदार ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई ..हर शेर उम्दा है 

Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on December 26, 2015 at 5:39pm

आदरणीय  धर्मेन्द्र कुमार जी ..............सुन्दर ग़ज़ल| बधाई 

Comment by Shyam Narain Verma on December 26, 2015 at 4:49pm
बहुत सुन्दर गजल।  ढेरों दाद कुबूल करें। सादर
Comment by gumnaam pithoragarhi on December 25, 2015 at 6:37pm

वाह खूब ग़ज़ल हुई है भाई जी वाह बधाई

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 25, 2015 at 11:07am
शुक्रिया आदरणीय नीलेश जी
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 25, 2015 at 11:06am
शुक्रिया आदरणीय दिनेश जी

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