For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पुरस्कार ( लघुकथा )// शशि बंसल

चिर प्रतीक्षित पत्रिका का अंक हाथ में आते ही कुसुम ने जल्दी-जल्दी पन्ने पलटने शुरू कर दिए । उसकी दृष्टि विशेष पृष्ठ पर जाकर ठहर गईं । हर्षातिरेक से दौड़कर पापा के पास पहुँची।" पापा , आज मैंने आपका सिर गर्व से ऊँचा कर दिया ।ये देखिये इस प्रतिष्ठित पत्रिका द्वारा आयोजित आलेख प्रतियोगिता में मुझे प्रथम पुरस्कार मिला है और आप हो कि सदा ही मुझे लिखने - पढ़ने से डाँटते रहते हैं । ये तो मम्मी है जो मुझे सदैव प्रोत्साहित करती हैं और लिखने में सहायता करतीं हैं ।"

उन्होंने कुसुम के हाथों से पत्रिका ली और शीर्षक पर दृष्टि डाली " क्यों नहीं स्वीकारता पुरुष स्त्रियों के गुण ..... " पापा उसका आलेख पढ़ रहे थे और वह उनका चेहरा,जिस पर न समझ में आने वाले भाव आ-जा रहे थे। सहसा पापा ने कहा," कुसुम जरा मेरे लिये चाय बना कर लाओ और अपनी माँ को यहाँ भेज दो।"

" क्यों पापा ? "

" क्योंकि तुम्हारी इस सफलता में उसका भी तो हाथ होगा न ? तो पुरस्कार तो उसको भी मिलना चाहिए । "

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Views: 488

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 7, 2015 at 9:36pm
आदरणीया शशि जी
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 7, 2015 at 9:34pm
सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई
Comment by pratibha pande on October 7, 2015 at 8:29pm

पिता से मनवा ही लिया माँ का महत्त्व ,इस बेटी ने  बधाई आपको इस सशक्त रचना के लिए शशि जी 

Comment by Omprakash Kshatriya on October 7, 2015 at 7:14pm

आदरणीया शशि जी , बहुत खूब कहा  आप ने इस में जिस का हाथ है पुरुस्कार उसी को मिलाना चाहिए. सुन्दर बधाई. इस सटीक रचना के लिए.

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 6, 2015 at 8:01pm
सुन्दर , कभी - कभी हम बहुत छोटी सी बात बहुत देर में समझ पाते हैं , जैसे इस कथा में आपने दर्शाया है। बहुत बहुत बधाई आदरणीय सुश्री शशी बंसल जी , सादर।
Comment by Sushil Sarna on October 6, 2015 at 6:46pm

भावपूर्ण लघुकथा  .... हार्दिक बधाई 

Comment by TEJ VEER SINGH on October 6, 2015 at 5:16pm

हार्दिक बधाई आदरणीय शशि बंसल जी! बहुत अच्छी शिक्षा प्रद लघुकथा!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

रामबली गुप्ता posted a blog post

कर्मवीर

आधार छंद-मनहरण घनाक्षरी सुख हो या दुख चाहें रहते सहज और, जग की कठिनता से जो न घबराते हैं। स्थिति…See More
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर और समसामयिक नवगीत रचा है आपने। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दोहा पंचक - आचरण

चाहे पद से हो बहुत, मनुज शक्ति का भान। किन्तु आचरण से मिले, सदा जगत में मान।। * हवा  विषैली  हो …See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई तिलक राज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। 9, 10…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। कुछ मिसरे और समय चाहते है। इस प्रयास के…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। आ. भाई तिलक राज जी के सुझाव से यह और…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई अजय जी, प्रदत्त मिसरे पर गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" आदरणीय तिलक राज कपूर साहब,  आप मेरी प्रस्तुति तक आये, आपका आभारी हूँ।  // दीदावर का…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई लक्ष्मण सिंह धानी ' मुसाफिर' साहब हौसला अफज़ाई के लिए  आपका बहुत-बहुत…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आपने खत लिखा उसका ही असर है साईंछोड़ दी अब बुरी संगत की डगर है साईं धर्म के नाम बताया गया भाई…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"ग़ज़ल पर अपनी बारीक़-नज़र से टिप्पणी करने के लिए आपका आभार आदरणीय तिलकराज जी।  एक प्रश्न है: इस…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service