For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तेरी आँखों की पलकों का, उठना बहुत ज़रूरी है।
इस चेहरे पर प्रेम पत्र है, पढना बहुत ज़रूरी है।।

कितनें सपनें इन आँखों नें, बुन रक्खे हैं तेरे लिए।
इन आँखों का हर इक पन्ना, खुलना बहुत ज़रूरी है।।

इस सीनें में जो इक दिल है, सरगम कोई सुनाता है।
धड़कन की इस मधुर राग को, सुनना बहुत ज़रूरी है।।

मेरे अधरों पर सदियों की, प्यास नें रेखाएं खींची हैं।
मधु सिंचन कर रेखाओं का, मिटना बहुत ज़रूरी है।।

इस बस्ती का घना अँधेरा, अपने चाँद को ढूंढ रहा है।
मनस् व्योम पर चंद्र किरण का, बिछना बहुत ज़रूरी है।।

त्याग दिया है इस जीवन की, अन्य सभी इच्छाओं को।
प्रीत अग्नि से मन जलता है, बुझना बहुत ज़रूरी है।।

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 603

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on February 27, 2016 at 1:39pm
आदरणीय सुनील जी सादर धन्यवाद
Comment by shree suneel on August 28, 2015 at 11:43pm
इस भावपूर्ण.. मनभावन प्रस्तुति के लिए आपको हार्दिक बधाई आदरणीय पंकज जी.
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 25, 2015 at 5:38pm
जी अवश्य भंडारी सर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 25, 2015 at 10:18am

आदरणीय पंकज भाई , गज़ल पर आपका गम्भीर प्रयास बहुत अच्छा लगा । आगे से बह्र का उल्लेख किया कीजिये ताकि सीखने वालों को समझने मे आसानी हो , इस मंच मे हम सभी एक दूसरे से सीख रहे हैं , यही इस मंच का उद्देश्य भी है ॥

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 23, 2015 at 11:11pm
आदरणीय समर कबीर सर और वामनकर सर आप दोनों लोगों को प्रणाम। मैं ग़ज़ल/ गीत की पाठशाला का एक विद्यार्थी मात्र हूँ।
एक वादा ज़रूर है कि आप लोगों द्वारा और ओबीओ परिवार के सुझावों पर अवश्य कार्य करूंगा।
Comment by Samar kabeer on August 23, 2015 at 11:02pm
जनाब पंकज कुमार मिश्रा जी,आदाब,आप में एक बात ये अच्छी लगी कि आप एक के बाद एक अपना कलाम पोस्ट करते हैं ,इस प्रस्तुति हेतु भी बधाई स्वीकार करें ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 23, 2015 at 11:01pm

आदरणीय पंकज जी बिना वज्न/बह्र के ग़ज़ल पर टीप थोड़ा मुश्किल काम है. सादर 

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 23, 2015 at 11:30am
बहुत बहुत आभार गोपाल सर; आगे से मीटर लिखा जायेगा।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 23, 2015 at 11:14am

अगर यह गजल है तो  इसका मीटर लिखना चाहिए था . पर इसमें   भाव व्यंजना बहुत ही अच्छी हुयी है  खासकर -मनस् व्योम पर चंद्र किरण का, बिछना बहुत ज़रूरी है।। आपको बधाई .

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 23, 2015 at 9:31am
सादर आभार, हर्ष महाजन सर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
13 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service