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सकल धरा पर तेरे रूप का ग्रन्थ लिखूँ

जितनी सुन्दर तुम हो उतने, सुंदर सुंदर छन्द लिखूँ।
जी करता है सकल धरा पर, तेरे रूप का ग्रन्थ लिखूँ ।।

झुकी निगाहें बिखरे गेसू, मन का मौसम सरस हुआ।
जी करता बस देखूँ देखूँ, तेरी छवि का दरश हुआ।।

रिमझिम बरस रहे सावन की, शीतल शीतल बूँद लिखूँ।
जी करता है सकल धरा पर, तेरे रूप का ग्रन्थ लिखूँ।।1।।

टपक रहीं बालों से बूँदें, धुली हुई इक पुष्पलता सी।
खुले अधर पर ठहरी बूँदें, जगी अभीप्सा यहाँ ख़ता की।।

बेसुध कर दे मन को पल में, ऐसी तुझे सुगंध लिखूँ।।
जी करता है सकल धरा को, तेरे रूप का ग्रन्थ लिखूँ।।2।।

होंठों पर मुस्कान का जादू, रति ये प्राण अनंग हुआ।
हिय पर होता नहीं है काबू, व्रत पंकज का भंग हुआ।।

रूप तेरा और मेरा समर्पण, उपवन और विहंग लिखूँ।
जी करता है सकल धरा पर, तेरे रूप का ग्रन्थ लिखूँ।।3।।

मनस नगर में प्रश्न कई थे, अब जाना कि तुम थे उत्तर।
चिंतन पथ पर धूप बहुत थी, छाँव मिली है तुमसे मिलकर।।

भटक रहा था व्याकुल होकर, अब खुद को निर्द्वंद लिखूँ।।
जी करता है सकल धरा पर, तेरे रूप का ग्रन्थ लिखूँ।।4।।


मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 19, 2015 at 1:00pm
सादर आभार जवाहर लाल सर
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on August 19, 2015 at 11:31am

बहुत सुन्दर गीत! आदरणीय pankaj जी!

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 18, 2015 at 8:03pm
सादर प्रणाम निवेदित है विजय सर।
ऊर्जा प्रदान करनें के लिए धन्यवाद
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 18, 2015 at 8:02pm
सादर अभिवादन और आभार स्वीकारें आदरणीय राजेश कुमारी मैम

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 18, 2015 at 7:22pm

बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति ..हार्दिक बधाई आपको पंकज कुमार जी 

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 18, 2015 at 3:42pm

आदरणीय विजय सर सादर प्रणाम और हार्दिक आभार

Comment by vijay nikore on August 18, 2015 at 1:06pm

सुन्दर भाव ! बधाई।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 18, 2015 at 9:17am
आदरणीय मिथिलेश सर और रवि शुक्ल सर आप सभी को हार्दिक आभार्।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 17, 2015 at 12:26pm

आदरणीय पंकज जी इस सुन्दर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई निवेदित है. सादर 

Comment by Ravi Shukla on August 17, 2015 at 10:19am

आदरणीय पंकज जी बधाई सुन्‍दर गीत पर

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