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.जशने आज़ादी है आज--(फ़िलबदीह ग़ज़ल.'राज')

२१२२  २१२२  २१२२   २१२१ 

दीप राहों में जलाओ जशने आज़ादी है आज,

 ध्वज वतन का लह्लहाओ जशने आज़ादी है आज,

 

भूल कर शिकवे गिले इक दूसरे का हाथ थाम

एक सुर में सुर मिलाओ जशने आज़ादी है आज,

 

रंग दी धरती जिन्होंने जान देकर खून से

,खूब उनके गीत गाओ ,जशने आज़ादी है आज,

 

जिस वतन के वास्ते तुम जाँ लुटाते आये हो,

दूरियाँ दिल से मिटाओ जशने आज़ादी है आज,

 

सरफरोशों की सभी कुर्बानियों का वास्ता,

फिर वही ज़ज्बे दिखाओ जशने आज़ादी है आज,

 

चढ़ गया हर शख्स पर इस वक़्त आज़ादी का रंग

, एकता की लौ जलाओ जशने आज़ादी है आज,

 

तुम चमन के बागवाँ हो तुम वतन के बादशाह,

सरहदों को जगमगाओ जशने आज़ादी है आज,

 

बैठ कर ऊँचे भवन में जश्न में डूबे बहुत,

 खाना भूखों को खिलाओ जशने आज़ादी है आज,

--मौलिक एवं अप्रकाशित 

 

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Comment by गिरिराज भंडारी on August 20, 2015 at 6:22am

सरफरोशों की सभी कुर्बानियों का वास्ता,

फिर वही ज़ज्बे दिखाओ जशने आज़ादी है आज,  -- बहुत खूब !

आदरणीया राजेश जी , अच्छी गज़ल कही है  सभी अश आर सुन्दर हुये हैं , आपको हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on August 19, 2015 at 12:06pm

बैठ कर ऊँचे भवन में जश्न में डूबे बहुत,

खाना भूखों को खिलाओ जशने आज़ादी है आज,

आदरणीया गजल और शेर के बारे में बिलकुल अबोध हूँ पर अंतिम शेर मुझे बहुत पसंद आया बहुत बहुत बधाई आपको!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 19, 2015 at 10:53am

आ० धर्मेन्द्र जी,ग़ज़ल पर आपकी दाद पाकर उत्साह दुगुना हो गया दिल से आभारी हूँ |शुक्रिया  

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on August 19, 2015 at 10:33am

बड़े खूबसूरत अश’आर हुए हैं आदरणीया राजेश कुमारी जी, दिली दाद कुबूल कीजिए


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 18, 2015 at 6:26pm

दिनेश कुमार जी ,इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभार |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 18, 2015 at 6:25pm

आ० लक्ष्मण रामानुज ,जी आपको ग़ज़ल पसंद आई दिल से बहुत- बहुत आभार आपका |

Comment by दिनेश कुमार on August 18, 2015 at 5:35pm
बहुत ख़ूब आ राजेश जी, जश्ने आजादी पर एक बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आप ने। हृदय से मुबारकबाद।
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 18, 2015 at 12:07pm

आजादी के पर्व (जश्ने आजादी) पर  उम्दा गजल  रचना  हुई है -

दीप राहों में जलाओ जशने आज़ादी है आज,

 ध्वज वतन का लह्लहाओ जशने आज़ादी है आज,

 

भूल कर शिकवे गिले इक दूसरे का हाथ थाम

एक सुर में सुर मिलाओ जशने आज़ादी है आज,

 

रंग दी धरती जिन्होंने जान देकर खून से

,खूब उनके गीत गाओ ,जशने आज़ादी है आज,

 - बहुत  बहुत  बधाई  आदरनीय  राजेश कुमारी जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 18, 2015 at 11:31am

आ० लक्ष्मण धामी भैया,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से आभार आपका | 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 18, 2015 at 11:29am

आ० समर कबीर भाई जी आदाब .ग़ज़ल पर आपकी दाद पाकर उत्साहित हूँ तहे दिल से आभार आपका आपको भी मुबारकबाद देती हूँ |

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