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बेटियाँ कभी उदास नहीं होतीं !!


वो तो होती हैं-

सृष्टि की अद्भुत कल्पना 

आनंददायक भावना।
वो रहती हैं-

आँगन की हवाओं में

पिता की दुआओं में ।
तभी तो खिल जाती है 
एक स्नेहिल मुस्कान 

हर लेती जो कितनी थकान।

बांटती है हमेशा-

खुशियों की सत्त्व-दीप्ति

मधुर जीवन संस्कृति।

वैसी कोई दूजी सुवास नहीं होती ।

क्योकिं बेटियाँ कभी उदास नहीं होतीं !!


वो तो दूर करती हैं-

उदासी, दोनों ही घरों की 

बनाती है जीवन इन्द्रधनुषी।
बेटियाँ हर लेती हैं- 
पीड़ा, संतप्त मन की 

घर की, आँगन की। 
और देती हैं हमें एक -
अलौकिक आनंद की अनुभूति

जैसे बनकर कोई सुधा-सूति।
वही तो होतीं हैं,

जब माँ पास नहीं होतीं ।
क्योकिं बेटियाँ कभी उदास नहीं होतीं !!

मौलिक एवम अप्रकाशित 

Views: 726

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Comment by विनय कुमार on July 16, 2015 at 11:51pm

रचना को सराहने का बहुत बहुत आभार आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी ।

Comment by विनय कुमार on July 16, 2015 at 11:50pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय आमोद बिंदौरी जी ।

Comment by amod shrivastav (bindouri) on July 16, 2015 at 11:32pm
वाह.....

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 16, 2015 at 11:26pm

इस भावमय रचना के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय ..

Comment by विनय कुमार on July 12, 2015 at 9:59pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री सुनील जी ..

Comment by shree suneel on July 12, 2015 at 9:07am
अच्छी. . ख़ूबसूरत प्रस्तुति के लिए आपको बधाइयाँ आदरणीय विनय कुमार सिंह जी.
Comment by विनय कुमार on July 8, 2015 at 11:04pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी , बिलकुल सच है , एक उम्र के बाद वो माँ का स्थान ले लेती हैं..

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 8, 2015 at 11:00pm

बेटियों के प्रति आपके उदगार प्रशंसनीय है बेटियां होती हैं ऐसी 

वही तो होतीं हैं,

जब माँ पास नहीं होतीं ।

वाह!

Comment by विनय कुमार on July 8, 2015 at 8:05pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय सुनील प्रसाद(शाहाबादी) जी , दिल से आभार..

Comment by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on July 8, 2015 at 7:31pm
बहुत खुबसूरत अभिव्यक्ति आदरणीय आपका कवि रूप भी बहुत प्यारा लग रहा है।

कृपया ध्यान दे...

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