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तरही गज़ल - ( फिल बदीह मे दिये मिसरे पर )तुम्हारे हाथ में ख़ंजर दिखाई देता है ( गिरिराज़ भंडारी )

1212    1122    1212   22 /112

फ़लक पे जो मुझे अक्सर दिखाई देता है

वो आम लोगों में तनकर दिखाई देता है

 

अभी हैं बदलियाँ चारों तरफ से घेरी हुईं  

तभी तो चाँद भी बदतर दिखाई देता है

 

जो तोप ले के चले साथ अपनें , वो हमको

कहें हैं हाथ में ख़ंजर दिखाई देता है

 

निजाम के कहीं साजिश का मारा वो भी न हो

जो रात दिन अभी घर पर दिखाई देता है

 

पलट न दें कहीं आकाश ये सताये हुये  

हरेक हाथ में पत्थर दिखाई देता है

वो छाँव बरगदी में खूब खेलते बच्चे

कहाँ , कहीं पे ये मंज़र दिखाई देता है

बहुत क़रीब से देखो न मेरे दागों को

रहेगा इंच वो गज भर दिखाई देता है

**********************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

 

 

 

 

 

 

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Comment

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 24, 2015 at 4:29pm

बहुत क़रीब से देखो न मेरे दागों को

रहेगा इंच वो गज भर दिखाई देता है--------------------- बहुत उम्दा, अनुज .

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on June 24, 2015 at 12:42pm

bahut sundar bhaee jee

badhaee

Comment by shree suneel on June 23, 2015 at 10:53pm
फ़लक पे जो मुझे अक्सर दिखाई देता है
वो आम लोगों में तनकर दिखाई देता है...व्वाहह! बहुत ख़ूब.
आदरणीय गिरिराज सर, शानदार ग़ज़ल हुई. एक से बढ़कर एक शे'र. हार्दिक बधाइयाँ आपको.
अभी हैं बदलियाँ चारों तरफ से घेरी हुईं
तभी तो चाँद भी बदतर दिखाई देता है.. ये भी ठीक.. हालांकि.. तब उतना भी बदतर चाँद होता नहीं. ये लफ्ज़ शायद ज्यादा संजीदा मालूम होता है इस संदर्भ में आदरणीय.
आख़िरी शे'र भी ख़ूब प्रभावित करता हुआ है. वैसे सर.. इसमें 'रहेगा ' के साथ 'देता है' का प्रयोग कुछ खटक सा रहा है. हो सकता है मैं ग़लत भी होऊं आदरणीय. कृपया अन्यथा न लें. सादर.
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 23, 2015 at 9:55pm

बहुत क़रीब से देखो न मेरे दागों को
रहेगा इंच वो गज भर दिखाई देता है।
सुन्दर, बधाई , आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, सादर।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 23, 2015 at 3:11pm

आदरणीय नरेन्द्र भाई , सराहना के लिये आपका आभार ।

Comment by narendrasinh chauhan on June 23, 2015 at 2:28pm

आदरणीय बहुत सुन्दर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 23, 2015 at 1:22pm

आदरणीय पाठको  गज़ल के ऊपर दिए अरकान मात्रा  लिखने में गलती हो गई है , कृपा कर बहर की मात्रा , निम्नानुसार पढ़ें 

 1212        1122       1212     22 / 112  --  धन्यवाद ॥

Comment by Rahul Dangi Panchal on June 23, 2015 at 12:20pm
आदरणीय बहुत सुन्दर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 23, 2015 at 12:01pm

आदरणीय धर्मेन्द्र भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 23, 2015 at 12:00pm

आदरणीय विनय भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार ।

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