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ज़िन्दगी और कविता

मैं तो शब्द पिरो रही थी यूँ ही

सोच रही थी ख्यालों में खोकर

क्या ऐसे ही चलती है ज़िन्दगी

जैसे अनजाने बनती हैं कवितायें

झरने की तरह प्रवाह सी बहती

बस हर शब्द बरसता है बूँद सा

टपकता है मन के बादलों से कही

और जुड़ जुड़ कर बनता जाता है

एक मिसरा..एक शेर..एक मतला

कभी दर्द में डूबा हुआ सियाह लफ्ज़

कभी खुशी की चाशनी में डूबा हुआ.

कभी मिलन की आस में शरमाया हुआ

कभी विरह की तड़प में टूटता हुआ शब्द

एहसासों की चादर में लिपटकर कभी

बस कह जाता हैं अनकहे मन की बातें

वक्त के साथ यूँ ही बातो बातों में.

खोये हुए एक अरसा बीत जाता है 

रेत के कणों सा हाथों से फिसलकर

दिल फिर एक रीता कागज़ रह जाता है

निधि 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 556

Comment

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Comment by Nidhi Agrawal on March 16, 2015 at 9:25am

आप सभी मित्रों का बहुत बहुत धन्यवाद् .. बस कोशिशें हैं 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 14, 2015 at 9:29pm

सुन्दर भावाभिव्यक्ति ...हार्दिक बधाई 

Comment by Shyam Mathpal on March 14, 2015 at 8:12pm

Aadarniya Nidhi Ji,

Man ke bhawon se hi kavita banti hai.  Aapne ne bhawon ko piroya hai. Bahut sundar . Dheron Badhai.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 14, 2015 at 6:38pm

रचना में बहुत ही सुंदर भाव ,उभर कर आयें हैं. प्रस्तुति पर बधाई , आदरणीया निधि जी

Comment by Hari Prakash Dubey on March 14, 2015 at 10:13am

आदरणीया निधि जी ,सुन्दर भावों से सुसज्जित इस रचना पर बधाई आपको ! सादर 

Comment by khursheed khairadi on March 14, 2015 at 9:51am

कभी दर्द में डूबा हुआ सियाह लफ्ज़

कभी खुशी की चाशनी में डूबा हुआ.

कभी मिलन की आस में शरमाया हुआ

कभी विरह की तड़प में टूटता हुआ शब्द

आदरणीया निधि जी ,सुन्दर भावाभिव्यक्ति है |सादर अभिनन्दन |

Comment by somesh kumar on March 14, 2015 at 8:36am

क्या ऐसे ही चलती है ज़िन्दगी

जैसे अनजाने बनती हैं कवितायें

aapke isi sval me jwavb bhi hai nidhi ji ,sunder bhavrnjit kvita,hardik bdhai

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 13, 2015 at 10:36pm
सुन्दर ,
अच्छा है ,
कल्पनायें यूँ ही
आगे बढ़तीं हैं ,
फिसलती हुई ,
ठहरती नहीं ,
रुकती नहीं ,
कहीं रेत सी ,
छोड़ जातीं हैं ,
अंतत: एक
खाली मुठी,
खाली-खाली मुठी।
आदरणीय सुश्री निधि प्लस जी , बधाई , सादर।
Comment by maharshi tripathi on March 13, 2015 at 9:46pm

बहुत सुन्दर ,,आ. निधि जी आपको हार्दिक बधाई |

Comment by umesh katara on March 13, 2015 at 6:53pm

वाहहहहहह निधि जी 

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