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दिल से हम असआर पकाया करते हैं - लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’

2222    2112   2222
***************************
पत्थर  पर  भी  प्यार  जताया करते हैं
इक  नूतन  संसार   बसाया   करते  हैं
****
लज्जत  तुमको  यार तनिक तो देंगे ही
दिल  से  हम असआर पकाया करते हैं
****
तनहा  हमको आप  समझना लोगो मत
हम  गम  का  दरवार  लगाया  करते  हैं
****
कुबड़ी  अपनी पीठ हुई  मत पूछो क्यों
यादों  का   हम  भार   उठाया  करते हैं
****
अश्कों से मत पूछ जिगर तक आजा तू
आँसू   केवल   सार   बताया   करते  हैं
****
जीवन बीता  किंतु न  समझे यारो हम
कैसे  दिल  के  तार   बजाया  करते  हैं
****
मौलिक और अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’

Views: 762

Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 11, 2015 at 10:51am

आ० भाई भाई श्याम जी ग़ज़ल पर उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 11, 2015 at 10:50am

आ० भाई महर्षि जी हार्दिक आभार l

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 11, 2015 at 10:49am

आ० भाई कृष्णा  जी , उत्साहवर्धन के लिए आभार l

Comment by Shyam Mathpal on March 10, 2015 at 10:19am

Aadarniya Dhami Ji,

Anand Aa gaya. Dil ko choo gaee.

कुबड़ी  अपनी पीठ हुई  मत पूछो क्यों
यादों  का   हम  भार   उठाया  करते हैं

Comment by maharshi tripathi on March 9, 2015 at 6:22pm

इस खूबसूरत गजल पर आपको हार्दिक बधाई आ.धामी जी |

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 8, 2015 at 9:56pm

सुन्दर गजल हुयी है बहुत बहुत बधाई!!सादर!

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 8, 2015 at 12:39pm

आ0 भाई हरिप्रकाश जी उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 8, 2015 at 12:38pm

आ0 भाई गोपाल नारायण जी , उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 8, 2015 at 12:37pm

आ0 भाई भुवन जी , आपको ग़ज़ल अच्छी लगी लेखन सार्थक हुआ . अनुमोदन के लिए हार्दिक धन्यवाद .
आ0 भाई

Comment by Hari Prakash Dubey on March 8, 2015 at 11:59am

अश्कों से मत पूछ जिगर तक आजा तू
आँसू   केवल   सार   बताया   करते  हैं...बहुत सुन्दर आदरणीय लक्ष्मण धामी जी , बधाई आपको ! सादर 

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