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"वैभव छन्द" की रचना- एक भगण, एक सगण तथा लघु गुरू अर्थात्- 211, 112, 12 के योग से की जाती है।


श्वेत बसन शारदे!

नित्य नमन राम को।
प्रेम रमन श्याम को।।
सूर्य प्रखर तेज है।
कंट असर सेज है।।1


रात दिन विचारता।
आर्त जन पुकारता।।
कष्ट तम हरो प्रभू।
ज्योति बल तुम्ही विभू।।2


विश्व सकल आप से।
सृ-िष्ट विकल ताप से।।
पाप-पतित तारना।
सत्य शिवम कामना।।3


जीव जड़ उदास है।
ज्ञान मन विलास है।।
धैर्य धन सुहास दो।
प्रेम पथ विकास दो।।4


जन्म-मरण गाज से।
गीत-गजल राज से।।
हीन मन सुधार दो।
प्रेम अमिय सार दो।।5


श्वेत बसन शारदे।
ज्ञान विमल वार दे।।
शब्द असर शान दो।
भक्ति अमर मान दो।।6


के0पी0सत्यम/ मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 11, 2014 at 11:44am

आ0 विजय भाईजी,   आपके स्नेह व सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by विजय मिश्र on October 8, 2014 at 11:56am
केवल भाई , सधे छंदों में रची सुंदर शारदे वंदना केलिए अशेष बधाई |
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 6, 2014 at 9:02pm

आ0 राजेश कुमारी जी, छन्द की सराहना व अनुमोदन हेतु आपका हार्दिक आभार।

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 6, 2014 at 8:56pm
आ0 श्याम नरायण भाईजी, छन्द की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 6, 2014 at 6:22pm

सुन्दर छंद में लिखी माँ शारदे वंदना बहुत खूब हार्दिक बधाई केवल प्रसाद जी .

Comment by Shyam Narain Verma on October 6, 2014 at 5:54pm

" अच्छी प्रस्तुति आदरणीय ,बधाई ................. "

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