For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गंगा के फ़ूल (लघु कथा) // --शुभ्रांशु पाण्डेय

छपाक्… ! 

मन्नू ने गंगा में कूद कर यात्रियों के चढ़ाये नारियल और फूल छान लिये. 

“अरे ये क्या किया.. जाने देते.. ”, एक यात्री डपटता हुआ चिल्लाया, “..फ़िर किसी और को बेच दोगे.. साले पूजा की चीजें भी नहीं छोडते हैं ये..” 
“जब पूजा करना तो बोलना.. वर्ना सरकार ने अब गंगा को गंदा करने वालों को जेल भेजना शुरु कर दिया है..”, एक तिरछी मुस्कान के साथ मन्नू ने आँख मारी. 

==========

(मौलिक और अप्रकाशित)

Views: 846

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Shubhranshu Pandey on July 21, 2014 at 2:14pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी, 

कथा पर विस्तृत विचार रखने के लिये घन्यवाद.

सादर.

Comment by Shubhranshu Pandey on July 21, 2014 at 2:06pm

आदरणीय गोपाल नारायण जी, कथा के पर अपने विचार रखने के लिये धन्यवाद.

सादर.

Comment by Shubhranshu Pandey on July 21, 2014 at 2:02pm

आदरणीया वेदिका जी.

आज सभी अपने आप् को अपडेट करते हैं मन्नु भी उसी में है. कथा पर विचार देने के लिये धन्यवाद्.

सादर.

Comment by Shubhranshu Pandey on July 21, 2014 at 2:01pm

आदरणीय संतलाल जी,

कथा पर समय देने के लिये धन्यवाद. 

सादर.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 21, 2014 at 12:53pm

कभी-कभी मन्नू जैसों के मुह लगने में बहुत बुरी मुहं की खानी पढ़ जाती है, मन्नू चाहे उस नारियल को बेचे या नही. अभी तो सरकारी निति उसके साथ है.  बहुत बढ़िया लघुकथा आदरणीय शुभ्रांशु जी, बहुत-२ बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 21, 2014 at 11:37am

पहली  नज़र में ये एक समसामयिक लघु कथा लगी जो अपनी बात स्पष्ट करने में सक्षम है ,वो कहते हैं न सावन के अंधे को हरा हरा ही दीखता है ,,,,यहाँ ये कहावत  अच्छी तरह चरितार्थ हो रही है (अर्थात मन्नू सफाई कर रहा हैऔर लोग गलत अर्थ में ले रहे हैं  )  दूसरा भाव ---जो डॉ गोपाल जी ने कहा वो भी हो सकता है कि मन्नू सरकार की इस नीति का फायदा  उठाकर हाजिर जबाबी कर रहा है (उसके अंत में आँख मारने से प्रतीत हो रहा है ) दोनों ही भाव में लघु कथा एक सोच को जन्म देती है अब पाठकों पर निर्भर है जिस तरह लें पर कहानी ने अपनी छाप छोड़ दी है इसमें दो राय नहीं हैं ,आपको बहुत बहुत बधाई शुभ्रांशु जी | 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 20, 2014 at 9:33pm

बहुत सुन्दर i

चोरी भी सीनाजोरी भी i

Comment by वेदिका on July 20, 2014 at 8:40pm
मन्नू का अपडेट होना बढ़िया लगा। और उस अपडेट का फायदा उठाना और भी बढ़िया।
बधाई आदरणीय शुभ्रांशु जी!
Comment by Santlal Karun on July 20, 2014 at 8:07pm

आदरणीय शुभ्रांशु पाण्डेय जी,

सामयिक चर्चा-परिचर्चा पर केन्द्रित प्रभावी लघुकथा, हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Monday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
Monday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service