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एक ताज़ा नवगीत -----जगदीश पंकज---मैं स्वयं निःशब्द हूँ,


एक ताज़ा नवगीत -----जगदीश पंकज

मैं स्वयं निःशब्द हूँ,
निर्वाक् हूँ
भौंचक्क ,विस्मित
क्यों असंगत हूँ
सभी के साथ में
चलते हुए भी

खुरदरापन ही भरा
जब जिंदगी की
हर सतह पर
फिर कहाँ से खोज
चेहरे पर सजे
लालित्य मेरे
जब अभावों के
तनावों के मिलें
अनगिन थपेड़े
तब किसी अवसाद
के ही चिन्ह
चिपकें नित्य मेरे

मुस्कराते फूल
हंसती ओस
किरणों की चमक से
हैं मुझे प्रिय
किन्तु, हैं अनुताप में
जलते हुए भी

बदलते जब मूल्य
जीवन के,
विवादित आस्थाएं
तब समायोजित करूँ
मैं किस तरह से
इस क्षरण में
देख कर अनदेख
सुनकर अनसुना
क्यों कर रहे हैं
वे ,जिन्हें सच
व्यक्त करना है
समय के व्याकरण में


भव्य पीठासीन,मंचित
जो विमर्शों में
निरापद उक्तियों से
मैं उन्हें कैसे
कहूँ अपना
सतत गलते हुए भी

मैं उठाकर तर्जनी
अपनी, बताना चाहता
संदिग्ध आहट
किस दिशा,किस ओर
खतरा है कहाँ
अपने सगों से
जो हमारे साथ
हम बनकर खड़े
चेहरा बदल कर
और अवसरवाद के
बहरूपियों से ,गिरगिटों से,
या ठगों से

मैं बनाना चाहता हूँ
तीर, शब्दों को
तपाकर
लक्ष्य भेदन के लिए
फौलाद में
ढलते हुए भी

----जगदीश पंकज
------------------------------------------------------------------------------------------

रचना मौलिक ,अप्रकाशित ,अप्रसारित
----जगदीश पंकज

Views: 1197

Comment

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Comment by सूबे सिंह सुजान on August 8, 2014 at 11:54pm

मैं बनाना चाहता हूँ
तीर, शब्दों को
तपाकर
लक्ष्य भेदन के लिए
फौलाद में
ढलते हुए भी.....................सुन्दर पंक्तियाँ बधाई

Comment by JAGDISH PRASAD JEND PANKAJ on August 8, 2014 at 11:12pm

 आत्मीय टिप्पणी के लिए ह्रदय से आभार ,भाई Asif Amaan जी !

Comment by Asif Amaan on August 8, 2014 at 11:12am

इसे कहते हैं कलाम.. वाह!! जिंदाबाद!!!!

Comment by JAGDISH PRASAD JEND PANKAJ on August 5, 2014 at 8:04pm

आत्मीय अभिमत के लिए ह्रदय से आभार, vandana जी !

Comment by JAGDISH PRASAD JEND PANKAJ on August 5, 2014 at 8:01pm

टिप्पणी के लिए ह्रदय से आभार ,भाई narendrasinh chauhan जी !

Comment by vandana on July 29, 2014 at 5:08am

बहुत प्रभावी नवगीत आदरणीय सादर बधाई स्वीकार कीजिये 

Comment by JAGDISH PRASAD JEND PANKAJ on July 16, 2014 at 9:07pm

आत्मीय अभिमत के लिए ह्रदय से आभार, वेदिका  जी !

Comment by वेदिका on July 16, 2014 at 12:56am
वाह! बेहद प्रभावी नवगीत!
शुभकामनाएं आदरणीय जगदीश जी!
Comment by JAGDISH PRASAD JEND PANKAJ on July 14, 2014 at 3:23pm

गीत पर आपके आत्मीय अभिमत के लिए ह्रदय से आभार, Maheshwari Kaneri जी !

Comment by Maheshwari Kaneri on July 14, 2014 at 2:05pm

वाह! बहुत ही सुन्दर नवगीत! आपको हार्दिक बधाई!आदरणीय जगदीश पंकज जी 

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