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वफादारी (लघुकथा) रवि प्रभाकर

मालिक और महा प्रबंधक कंपनी में चल रही हड़ताल को लेकर कुछ गंभीर विचार विमर्श कर रहे थे कि अचानक कुछ आवारा कुत्ते बंगले के अंदर आ घुसे। साहिब का खूंखार पालतू कुत्ता बड़ी फुर्ती से उन आवारा कुत्तों पर झपटा और उन्हें दूर तक खदेड़ आया, तभी एक नौकर धीरे से मालिक के कान में आकर फुसफुसाया
“साहिब,  वो यूनीयन के दूसरी तरफ वाले लीडर आ गए है।”
मालिक के तनावग्रस्त चेहरे पर एकाएक कुटिल मुस्कुराहट आ गई, और उसने मांस का एक बड़ा सा टुकड़ा अपने वफादार कुत्ते के आगे फैंक दिया ।

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Comment by rajesh kumari on June 15, 2014 at 5:40pm

इशारों इशारों में बहुत कुछ कह गई ये लघु कथा यह एक आज का कटुसत्य है| बधाई आपको  

Comment by savitamishra on June 15, 2014 at 8:58am

बहुत बढ़िया लघुकथा

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 14, 2014 at 11:03pm

बहुत बढ़िया लघुकथा, यही एक कटु सत्य है जिसे जो चाहिए मिल गया. बहुत बहुत बधाई आदरणीय रवि जी

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 14, 2014 at 6:26pm

आह--- वफादार कुत्ते  i

इन्ही के बल पर अंग्रेजो ने इस देश में लगभग  २५० वर्ष तक शासन किया i अफ़सोस की यह प्रजाति कभी नष्ट नहीं होती i

सुन्दर लघु कथा हेतु  बधायी स्वीकार करे आदरणीय i

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