For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बेटियाँ ,बेटी,बिटिया [कुण्डलिया]

1.
बिटिया ना अपनी हुई कैसा रहा विधान 
राजा हो या रंक की बिटिया सभी समान 
बिटिया सभी समान रहेंगी सदा बेगानी
छोड़ो झूठे मोह ,पड़ेगी रीत निभानी 
उसका कहाँ कुसूर मिली गरीब की कुटिया 
सरिता कहती मान पराई होती बिटिया 
संशोधित 
........................................
2.
बेटी ना अपनी हुई, कैसा रहा विधान 
राजा हो या रंक की, बेटी सभी समान 
बेटी सभी समान, कहाँ चलती मनमानी 
निर्धन या धनवान पराई लेकिन रानी 
लक्ष्मी का है रूप कहो मीना या टीना 
कहती सरिता मान अपनी हुई बेटी ना 
...................................
3.
बसती जिस घर बेटियाँ महक उठे परिवार 
दो घर को हैं जोड़ती बाँटें शुभ संस्कार
बाँटें शुभ संस्कार नहीं भेदभाव करना   
मांगें केवल स्नेह हौंसला उनका बनना 
आँगन खिलते फूल बेटियाँ हैं जब हँसती 
सरिता देना प्यार यहाँ भी बेटी बसती 
...........................................
......मौलिक व अप्रकाशित ..........

Views: 735

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sarita Bhatia on April 16, 2014 at 1:16pm

आदरणीय लक्ष्मण जी हार्दिक आभार ...सादर 

Comment by Sarita Bhatia on April 16, 2014 at 1:15pm

शुक्रिया लक्ष्मण धामी जी 

Comment by Sarita Bhatia on April 16, 2014 at 1:15pm

आदरणीया कल्पना दी आपके सुझाव यथोचित हैं मार्गदर्शन एवं स्नेह बनाये रखें 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 15, 2014 at 5:59pm

बहुत सुन्दर भाव रचित कुंडलिया छंद | जहा लय बाधित है, आद कल्पना जी ने बता दिया है | सादर बधाई 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 14, 2014 at 9:33am

आदरणीय सरिता जी , भावपूर्ण कुंडलियों के लिए हार्दिक बधाई ,

Comment by कल्पना रामानी on April 11, 2014 at 7:43pm

बहुत सुंदर कुण्डलिया सरिता जी, मन से बधाई आपको। दूसरी और तीसरी कुण्डलिया की इन पंक्तियों में लय बाधित हो रही है, सुझाव पर गौर कर लीजिएगा।/सादर

कहती सरिता मान "अपनी हुई बेटी ना"....हुई अपनी बेटी ना

बाँटें शुभ संस्कार "नहीं भेदभाव करना"...भेद ना कोई करना

Comment by Sarita Bhatia on April 11, 2014 at 5:14pm

आदरणीय शिज्जू भाई दिशा निर्देश के लिए हार्दिक आभार ,सुधार लेती हूँ 

Comment by Sarita Bhatia on April 11, 2014 at 5:14pm

आदरणीय अन्नपूर्णा जी , मीना पाठक जी आभार ...सादर 

Comment by Sarita Bhatia on April 11, 2014 at 5:13pm

आदरणीय श्याम जी हार्दिक आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 11, 2014 at 4:01pm

//रहेंगी सदा बेगानी//

आदरणीया सरिता जी यहाँ 14 मात्रायें हो रहीं है

कहन के लिये बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service