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मेरे जीवन के मधुबन में : गीत /नीरज नीर

सुगंध बनकर आ जाओ तुम
मेरे जीवन के मधुबन में

प्रेम सिंचित हरी वसुंधरा
पल पल में जीवन महकाओ
परितप्त ह्रदय के मरुतल पर
मेघा दल बन कर छा जाओ
बस जाओ न प्रतिबिम्ब बनकर
मेरे जीवन के दर्पण में.
सुगंध बनकर आ जाओ तुम
मेरे जीवन के मधुबन में ..

तुझ से ही है मेरा होना
तुझ से मिलकर हँसना रोना
तुम चन्दा , मैं टिम टिम तारा
अर्पण तुझ पर जीवन सारा
तुझ से दूर रहूँ मैं कैसे
आसक्त बंधा हूँ बंधन में
सुगंध बनकर आ जाओ तुम
मेरे जीवन के मधुबन में ...

प्रेम भाव की अविरल धारा
तुम दिल जीती या मैं हारा
बात बराबर दोनों ही है
तुम मेरी या मैं तुम्हारा
एक ख्वाब बन कर बसी रहो
तुम मेरे दोनों नयनन में
सुगंध बनकर आ जाओ तुम
मेरे जीवन के मधुबन में ..

नीरज कुमार नीर 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 824

Comment

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Comment by Neeraj Neer on April 19, 2014 at 8:21pm

आपका हार्दिक आभार आदरणीया डॉ प्राची सिंह साहिबा.. आपकी सलाह सर आँखों पर .. 

Comment by Neeraj Neer on April 19, 2014 at 8:20pm

सलीम राजा साहब आपका आभार.. 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 19, 2014 at 5:47pm

प्रेम भाव को समर्पित सुन्दर गीत रचा है आ० नीरज नीर जी 

दुसरे और तीसरे बंद का प्रवाह बहुत सुन्दर है

तुझ से ही है मेरा होना 
तुझ से मिलकर हँसना रोना 
तुम चन्दा , मैं टिम टिम तारा
अर्पण तुझ पर जीवन सारा 
तुझ से दूर रहूँ मैं कैसे 
आसक्त बंधा हूँ बंधन में..................वाह 

उस दृष्टी से प्रथम बंद और मुख्य पंक्तियाँ थोड़ा सा और प्रयत्न मांगती हैं 

बनकर सुगंध तुम आ जाओ................यदि ऐसे करें तो ?

मेरे जीवन के मधुबन में 

इस स्वप्न पगे सुन्दर गीत के लिए हार्दिक बधाई 

Comment by SALIM RAZA REWA on April 12, 2014 at 10:11pm

सुन्दर  गीत के लिये बधाई

Comment by Neeraj Neer on April 11, 2014 at 8:41am

जितेन्द्र गीत भाई साहब बहुत बहुत धन्यवाद .

Comment by Neeraj Neer on April 11, 2014 at 8:41am

आ. गिरिराज भंडारी साहब आपका आभार. 

Comment by Neeraj Neer on April 11, 2014 at 8:40am

हार्दिक आभार आदरणीया अन्नपूर्ण बाजपाई जी . 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 10, 2014 at 10:51pm

तुझ से ही है मेरा होना
तुझ से मिलकर हँसना रोना
तुम चन्दा , मैं टिम टिम तारा
अर्पण तुझ पर जीवन सारा
तुझ से दूर रहूँ मैं कैसे
आसक्त बंधा हूँ बंधन में
सुगंध बनकर आ जाओ तुम
मेरे जीवन के मधुबन में.................बहुत सुंदर. मन को छू जाते भाव, हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीय नीरज जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 10, 2014 at 10:48pm

आदरणीय नीरज भाई , सुन्दर प्रेम गीत के लिये बधाइयाँ !! 

Comment by annapurna bajpai on April 10, 2014 at 2:12pm

आ0 नीरज कुमार जी सुंदर गीत , बधाई स्वीकारें । 

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