For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल: वो चिड़ियों जैसे पर लाया

बस्ते में रोटी भर लाया

बच्चा भी ये क्या घर लाया 


होठों पे खुशियाँ धर लाया
वो बोले किसकी हर लाया

सोने चांदी सब नें मांगे
वो चिड़ियों जैसे पर लाया

इक तूफानी झोंका आया
जाने किसका छप्पर लाया

दुत्कारा लोगों नें उसको
जो धरती पे अम्बर लाया

काम के इंसा मैंने मांगे
वो बस्ती से शायर लाया

भुवन निस्तेज
(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 657

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 4, 2014 at 2:53pm

आ. भुवन भाई , बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है , आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 4, 2014 at 2:40pm

एक बात स्पष्ट करूँ आदरणीय भुवनजी, मैं क्यों कर की बात कर रहा हूँ. न कि क्या कर की. शायद पिछली बार क्या कर को क्यों कर पढ़ गया होऊँ.  हो सकता है. फिरभी, क्या कर लाया बहुत संप्रेषणीय वाक्यांश नहीं है.

या, चूँकि मैं मतले का अर्थ स्पष्ट नहीं समझ पा रहा हूँ, आप कृपया मुझे वहाँ पहुँचायें जहाँ इस मतले का अर्थ है. शायद फिर मु्झे अर्थ सुलभ हो पायेगा.

सादर

Comment by भुवन निस्तेज on April 4, 2014 at 2:01pm

आदरणीय Saurabh Pandey साहब स्नेह हेतु आभार.

मतले का उला ''घर से वो ये क्या कर लाया
बस्ते में रोटी भर लाया'' है. क्या कर के  प्रयोग से अस्पष्टता है या क्यों कर के प्रयोग से या दोनों के कृपया मार्गदर्शन प्रदान करें. मैं मतले पर यथोचित श्रम करूँगा.

मकते पर मैं पुनर्विचार कर रहा हूँ ...

आभार...

Comment by Arun Sri on April 3, 2014 at 12:02pm

//घर से वो ये क्या कर लाया
बस्ते में रोटी भर लाया//

सोने चांदी सब नें मांगे
वो //चिड़ियों जैसे पर// लाया

काम के इंसा मैंने मांगे
वो बस्ती से //शायर// लाया

इक तूफानी झोंका //आया//
जाने किसका छप्पर लाया

अच्छा प्रयास हुआ है गज़ल पर !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 3, 2014 at 11:47am

सोने चांदी सब नें मांगे
वो चिड़ियों जैसे पर लाया

काम के इंसा मैंने मांगे
वो बस्ती से शायर लाया.. .. वाह वाह !

इन दो शेरों के लिए बहुत बहुत बधाई.

वैसे, एक बात कहूँ, क्यों कर का सही अर्थ है कैसे. अब मतले को इस अर्थ के साथ देखें. शायद वह अस्पष्ट लगने लगे.

इसी तरह आखिरी शेर भी मेरे लिए अस्पष्ट रहा. इसके उला सानी में बह्र की नहीं मायने की अस्पष्टता लगी है. 

इक तूफ़ानी वाले शेर में ऐब है.

सादर

Comment by भुवन निस्तेज on March 30, 2014 at 5:18pm

आदरणीय Dr Ashutosh Mishra  साहब, आप को कोटि नमन, कृपया इस्लाह देते रहें … 

Comment by भुवन निस्तेज on March 30, 2014 at 5:17pm

आदरणीय अरुन शर्मा 'अनन्त'  जी मैंने तक्तीअ तो २२२२ २२२२ से कि है शायद कहीं भटक गयी हो, कृपया सलाह दे… 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 28, 2014 at 5:44pm

भुवन जी 

सोने चांदी सब नें मांगे

वो चिड़ियों जैसे पर लाया

  इस शे र के लिए तहे दिल बधाई सादर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on March 28, 2014 at 10:58am

कृपया ग़ज़ल की बह्र से अवगत करायें

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
16 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
23 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
23 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"    आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रस्तुत दोहों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार ।…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"किल्लत सारे देश में, नहीं गैस की यार नालियाँ बजबजा रही, हर घर औ हर द्वार गैस नहीं तो क्या हुआ, लोग…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। दोहों पर आपकी विस्तृत टिप्पणी और सुझाव के लिए हार्दिक…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"*पका न पाती  रोटियाँ, भले  युद्ध की आगजला रही है नित्य पर, वह निर्धन का…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service