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लफ़्ज़ कब जज़्बात को पूरे पड़े ? ( ग़ज़ल ) गिरिराज भंडारी

2122     2122        212 ( पूरा ) 

 

इस फ़िज़ा के शोख नज़्ज़ारे भी देख

बाग  मे  पानी के  फौव्वारे भी देख

 

सिर्फ  सूखे  तू शज़र   देखा  न  कर

हो  रहे  पत्ते   हरे   सारे  भी   देख  

 

तू अमा में चाँद  खातिर , ज़िद  न कर        

आ कभी आकाश में तारे भी देख

सिर्फ  भारी रह सकूँ , ये सोच  मत  

कैसे उड़ते, हलके  गुब्बारे  भी  देख  

 

चन्द  हँसती  सूरतों  से  खुश न हो  

देख  आँसू , दर्द  के  मारे  भी  देख

 

जीत  से  कोई  नही  सीखा   कभी

ज़िन्दगी से हम कहाँ  हारे ,भी देख

 

लफ़्ज़ कब  जज़्बात  को  पूरे  पड़े ?

भीगती  आँखों  में  अंगारे भी देख  

 

********************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 18, 2014 at 4:25pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी , फौसला अफज़ाई के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 18, 2014 at 4:24pm

आदरणीय आशीष भाई , ग़ज़ल की तारीफ कर उत्साह वर्धन करने के लिये आपका आभारी हूँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 18, 2014 at 4:23pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई , ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 18, 2014 at 2:46pm

चन्द  हँसती  सूरतों  से  खुश न हो  

देख  आँसू , दर्द  के  मारे  भी  देख----शानदार वाह्ह 

 

जीत  से  कोई  नही  सीखा   कभी

ज़िन्दगी से हम कहाँ  हारे ,भी देख-----बेहतरीन वाह्ह्ह 

बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है आ. गिरिराज जी तहे दिल से दाद कबूलें  

 

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on February 18, 2014 at 12:53pm

सिर्फ  भारी रह सकूँ , ये सोच  मत  

कैसे उड़ते, हलके  गुब्बारे  भी  देख  |  बहुत खूब !!

चन्द  हँसती  सूरतों  से  खुश न हो  

देख  आँसू , दर्द  के  मारे  भी  देख |  वाह !!

बढ़िया ग़ज़ल आदरणीय गिरिराज जी !!

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 18, 2014 at 7:58am

आदरणीय भाई गिरिराज जी बहुत उम्दा ग़ज़ल कही , इन असआरों के लिए विशेष बधाई

सिर्फ  सूखे  तू शज़र   देखा  न  कर

हो  रहे  पत्ते   हरे   सारे  भी   देख

लफ़्ज़ कब  जज़्बात  को  पूरे  पड़े ?

भीगती  आँखों  में  अंगारे भी देख


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 17, 2014 at 10:21pm

आदरणीय राम शिरोमणी भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हृदय से आभारी हूँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 17, 2014 at 10:20pm

आदरणीय शिज्जू भाई , ग़ज़ल को आपकी सराहना मिली , बड़ी खुशी हुई , आपका हार्दिक आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 17, 2014 at 10:18pm

आदरणीय अनिल भाई , ग़ज़ल की सराहना के लिये आप्का हार्दिक  आभार ॥

Comment by ram shiromani pathak on February 17, 2014 at 10:12pm

ज़ोरदार ग़ज़ल आदरणीय … बहुत बहुत बधाई आपको

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