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बह के पानी की तरह अब दूर तक वो जायेगा ( ग़ज़ल ) गिरिराज भंडारी

2122   2122  2122    212

बंदरों को फिर मिला शायद मसलने के   लिये

फूल ने मंसूबा कल बान्धा था खिलने के लिये

 

बह के पानी की तरह अब दूर तक वो जायेगा

दर्द  को मैने  रखा था  कल पिघलने के लिये 

 

वक़्त ने  कुछ वक़्त  देने की  नहीं हामी भरी

मैने  थोड़ा  वक़्त  मांगा था सँभलने के लिये  

 

सूर्य निकला तो समय में अस्त होगा भी ज़रूर                                  

चाँद को फिर हड़बड़ी क्यों है निकलने के लिये

 

किसने रख दी आँच उनकी ख़्वाहिशों के पास में

चंद  लम्हें  बच  गये  उनको  उबलने  के  लिये

 

हौसला  गर   है  शमा  सा  जो तुम्हारे पास तो  

खूब   परवाने   मिलेंगे   रोज़   जलने  के   लिये

 

कब इज़ाजत मुफ़लिसी देती है ख़्वाबों की उन्हें 

यूँ   मचलते  रोज़  हैं  अरमाँ  मचलने  के लिये

 

थरथराती  उँगलियाँ  कानों में मेरे कह रहीं

चल, इशारा  हो गया  है याँ से चलने के लिये

************************************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित ( संशोधित )

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 12, 2014 at 10:46am

आदरणीय रमेश भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका तहेदिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 12, 2014 at 10:45am

आदरणीय चंद्र शेखर भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ॥

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 12, 2014 at 10:06am

वक़्त ने  कुछ वक़्त  देने की  नहीं हामी भरी

मैने  थोड़ा  वक़्त  मांगा था सँभलने के लिये.........बहुत शानदार, लाजवाब शेर

हार्दिक बधाई आपको आदरणीय गिरिराज जी 

Comment by MAHIMA SHREE on February 11, 2014 at 10:52pm

 

बह के पानी की तरह अब दूर तक वो जायेगा

दर्द  को मैने  रखा था  कल पिघलने के लिये 

 

वक़्त ने  कुछ वक़्त  देने की  नहीं हामी भरी

मैने  थोड़ा  वक़्त  मांगा था सँभलने के लिये  

 

 

 

वाह बहुत खूब शानदार ग़ज़ल आदरणीय गिरिराज जी हार्दिक बधाई आपको सादर

Comment by रमेश कुमार चौहान on February 11, 2014 at 9:31pm

आदरणीय भैयाजी  बेहतरीन गजल हुई, सुंदर कथ्य समेटे है आपने बधाई बधाई

वक़्त ने  कुछ वक़्त  देने की  नहीं हामी भरी

मैने  थोड़ा  वक़्त  मांगा था सँभलने के लिये  -----अति सुंदर

Comment by CHANDRA SHEKHAR PANDEY on February 11, 2014 at 7:10pm
जय हो जय हो

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