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गज़ल - नाफरमानी लिखना (अरुन श्री)

आह   लिखो , हुंकार   लिखो ,  कुर्बानी  लिखना

बंद    करो   किस्सों   में    राजा  रानी  लिखना

 

सूखे   खेतों   की   किस्मत  में   पानी  लिखना

अब   लिखना  तो  पीलेपन  को  धानी  लिखना

 

और   भी   हैं   रिश्ते यारों  तुम  छोडो  भी अब

महबूबा   के    दर   अपनी    पेशानी    लिखना

 

मानवता   उन्वान ,  भरा  हो   प्रेम   कहन  में    

अपना   जीवन   ऐसी   एक   कहानी   लिखना

 

जब भी  तुम अपने लब पर मुस्कान लिखो तब

मेरे   माथे   पर   भी   कुछ   ताबानी   लिखना

 

जो  कर  दें   दरबारी   धार  कलम   की ,  ऐसे -

शाही    फरमानों    पर    नाफरमानी   लिखना
.
.
................................................. अरुन श्री !
मौलिक व अप्रकाशित

Views: 941

Comment

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Comment by Arun Sri on January 23, 2014 at 10:41am

शिज्जु शकूर सर , बहुत धन्यवाद !

Comment by Arun Sri on January 23, 2014 at 10:41am

अरुन शर्मा 'अनन्त' भाई , सराहने के बहुत बहुत धन्यवाद आपको !

Comment by Vindu Babu on January 23, 2014 at 4:17am

गज़ल का  संदेश बहुत भाया आदरणीय अरुण जी।

सादर बधाई स्वीकारें इस सुंदर गज़ल के लिए।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 22, 2014 at 7:46pm

बेहतरीन ग़ज़ल भाई अरुणजी बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिये

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 22, 2014 at 12:56pm

वाह वाह अरुन श्री भाई जी जबरदस्त अशआर धारदार ग़ज़ल मजा आ गया पढ़कर ढेरों दिली दाद कुबूल फरमाएं.

Comment by Arun Sri on January 22, 2014 at 12:40pm

नादिर ख़ान  सर ,  बहुत धन्यवाद आपको !

Comment by Arun Sri on January 22, 2014 at 12:39pm

vijay nikore  सर , गज़ल को सराहने के लिए बहुत धन्यवाद आदरणीय !

Comment by Arun Sri on January 22, 2014 at 12:38pm

vandana  मैम , सराहने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपको !

Comment by Arun Sri on January 22, 2014 at 12:37pm

laxman dhami सर , कोशिश रहेगी कि आप सब को यूँ ही पसंद आता रहूँ ! धन्यवाद !

Comment by Arun Sri on January 22, 2014 at 12:36pm

वीनस केसरी सर , ये बहुत खुशी का विषय है कि आपने पास कर दिया गज़ल को ! :-))))))) बहुत बहुत धन्यवाद !

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