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ग़ज़ल- अब राजनीति सबकी रगों में समा गई

2 2 1 2 1 2 1 1 2 2 1 2 1 2

अब राजनीति सबकी रगों में समा गई

विश्वास खो गया,तो कंही आस्था गई ।।

मैं देखता हूँ मेरे नगर में ये क्या हुआ, 

लडकी खुशी-खुशी से ही इज्जत लुटा गई।

हर मोड पर जो शहर के आवारगी खडी, 

मैं क्या करूँ बजुर्गों की चिन्ता बढा गई।

बादल न जाने किसके हवन पर गया कंही,

रूठी  हुई  सी  तन्हा  अकेली  हवा गई।

महफिल में ही किसी ने मेरी बात छेड दी,

सुनते ही इतना रूप की गागर लजा गई।

मैं इन्तजार में खडा था रेलगाडी की,

पागल हवा अकेली थी,नज़रें लडा गई।  

यह ग़ज़ल- मौलिक व अप्रकाशित है।

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Comment by सूबे सिंह सुजान on January 17, 2014 at 9:01am

annapurna bajpai, आपका स्नेह मिला ।। बहुत अच्छा लगा।। धन्यवाद

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 17, 2014 at 7:57am

भाई सूबे सिंह जी,  बढ़िया ग़ज़ल के लिए आपको  हार्दिक बधाई

मैं देखता हूँ मेरे नगर में ये क्या हुआ,

लडकी खुशी-खुशी से ही इज्जत लुटा गई

अति आधुनिकता पर कहा गया यह शेर लाजवाब है .

Comment by बृजेश नीरज on January 17, 2014 at 7:41am

अच्छी ग़ज़ल हुई है! आपको हार्दिक आभार!

आदरणीय सही शब्द ' कहीं ' होता है.

Comment by रमेश कुमार चौहान on January 16, 2014 at 10:37pm

सभी शेअर लाजवाब है । बहुत बहुत बधाई


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on January 16, 2014 at 7:06pm

भाई सूबे सिंह सुजान जी, ग़ज़ल बढ़िया हुई है जिसके लिए आपको दिली बधाई देता हूँ. तीसरे, पांचवें और छठे  शेअर में तकाबुल-ए-रदीफैन नामक ऐब है, उन अशआर पर दोबारा नज़र-ए-सानी फरमा लें.    

Comment by annapurna bajpai on January 16, 2014 at 6:03pm

अति सुंदर गजल हेतु बहुत बधाई आपको । 

Comment by सूबे सिंह सुजान on January 15, 2014 at 10:24pm

 gumnaam pithoragarhi

गुमनाम जी तहे-दिल से शुक्रिया.....हृदयग्राही टिप्पणी आये तो मन पुलकित हो ही जाता है।

जिस शेर को आपने पसंद किया है। यह हाल आज के समय में पूरे देश के हो गये हैं। जो कि बहुत ही चिन्तनीय है।

Comment by सूबे सिंह सुजान on January 15, 2014 at 10:22pm

coontee mukerji, कुन्ती जी, जरूर एक्सीडेंट जैसे स्वभाविक होता है। ऐसे ही  कहा गया है।। आपका बेहद शुक्रिया

जब  किसी की हृदयग्राही टिप्पणी आये तो मन पुलकित हो ही जाता है। फिर से धन्यवाद।

Comment by सूबे सिंह सुजान on January 15, 2014 at 10:20pm

Er. Ganesh Jee "Bagi, जी नमस्कार आपकी , तरफ से बधाई , आई  आपका बेहद शुक्रिया

जब  किसी की हृदयग्राही टिप्पणी आये तो मन पुलकित हो ही जाता है। फिर से धन्यवाद।

Comment by सूबे सिंह सुजान on January 15, 2014 at 10:18pm

Meena Pathak, जी आपकी तारीफ से मन पुलकित हो गया।। आपका विशेष आभार।

जब  किसी की हृदयग्राही टिप्पणी आये तो मन पुलकित हो ही जाता है। फिर से धन्यवाद।

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