For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अश्क का दरिया भी रुख पे आ गया

अब्रे गम जब दिल पे मेरे छा गया

अश्क का दरिया भी रुख पे आ गया

आइना देखा है जब भी दोस्तों

सामने मेरे मेरा सच  आ गया

यूं तो गुल लाखों थे बगिया में मगर

दिल को लेकिन कोई कांटा  भा गया

वो हसीं गुल आने वाला है इधर

चूम झोंका खुशबू का बतला गया

हाल उनसे कहते दिल का जब तलक

यार नजरों से ही सब जतला गया

जिसने भर दी खार से ये जिन्दगी

फूल नकली दे के फिर बहला गया

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 684

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by MAHIMA SHREE on December 25, 2013 at 10:02pm

हाल उनसे कहते दिल का जब तलक

यार नजरों से ही सब जतला गया.... वाह बेहद उम्दा .. बहुत -२ बधाई आपको  सादर ..

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 25, 2013 at 3:11pm

वाह वाह आदरणीय आशुतोष सर बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल कही है अंतिम शेर हेतु विशेष दाद कुबूल फरमाएं.

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 25, 2013 at 11:54am

आशुतोष जी

इस अर्थपूर्ण ग़ज़ल के लिए आपको बधाई हो i

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 25, 2013 at 6:45am

जिसने भर दी खार से ये जिन्दगी
फूल नकली दे के फिर बहला गया
वाह क्या कहने, आदरणीय भाई आशुतोष जी बधाई .

Comment by coontee mukerji on December 24, 2013 at 10:26pm

हाल उनसे कहते दिल का जब तलक

यार नजरों से ही सब जतला गया..........बहुत खूब.

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 24, 2013 at 7:49pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी हौसला अफजाई के लिए तहे दिल शुक्रिया ..आदरणीय बागी जी के मार्गदर्शन के अनुरूप परिवर्तन कर लिया है .जिससे शेर पहले से बढ़िया हो गया है . आप सभी का स्नेह यूं ही सतत मिलता रहे ..सादर 

Comment by annapurna bajpai on December 24, 2013 at 6:16pm

आ0 आशुतोष जी सुंदर गजल हेतु बधाई स्वीकारें । आ0 बागी जी के द्वारा बताए गए संशोधनों को करके देखिये गजल और अधिक खूबसूरत हो सकती है । सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 24, 2013 at 5:48pm

आदरणीय श्याम जी .हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया .बस यूं ही स्नेह बनाएं रखें सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 24, 2013 at 5:47pm

आदरणीय बागी सर ..आपका सतत प्रोत्साहन और मार्गदर्शन मुझे मिलता रहा है ..आपके सुझाव मुझे बेहद पसंद आये थोड़े से परिवर्तन से ही शेर खुद मुझे अब बेहतर लग रहा है ,,आपके मार्गदर्शन के अनुरूप परिवर्तित करूंगा ..तहे दिल धन्यवाद और भविष्य में भी आपका स्नेह यथावत मिलता रहे ऐसी कामना के साथ ,,सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 24, 2013 at 5:42pm

आदरणीय अभिनव जी ..आपके द्वारा उत्साह वर्धन से मुझे सतत ही हौसला मिलता रहा है ..एक बार पुनः हौसला अफजाई के लिए तहे दिल धन्यवाद ..

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
10 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
19 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service