For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुछ दोहे ....................डॉ० प्राची

भाव भँवर को पार कर , अर्पण कर सर्वस्व 

जड़ता जो चेतन करे , उसका चिर वर्चस्व // 1 //

संवेदन से हीन जो , भाव भक्ति से मुक्त 

प्रस्तर सम वह जड़ हृदय , अहंकार से युक्त // 2 //

मूढ़ व्यक्ति के मौन में , परिलक्षित अज्ञान 

संत जनों के मौन का , मूल तत्व निज ज्ञान // 3 //

सजग बुद्धि को दृष्ट है , चित्त वृत्ति का नृत्य 

ज्ञान अगन तप वृत्ति का , सधता है हर कृत्य // 4 //

नहिं अनंत में वृद्धि है , नहिं अनंत का ह्रास 

जो सअंत निज जानता , पाता वह संत्रास // 5 //

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 978

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 11, 2013 at 4:35pm

प्रिय वंदना जी 

दोहों के कथ्य को आपने सराहा व भावार्थ को समझने की चेष्टा की मुझे इस बात की हार्दिक प्रसन्नता है....आपका बहुत बहुत धन्यवाद!

आपके लिए चौथे दोहे का अर्थ यहाँ स्पष्ट कर रही हूँ...:))

सजग बुद्धि को दृष्ट है , चित्त वृत्ति का नृत्य 

ज्ञान अगन तप वृत्ति का , सधता है हर कृत्य // 4 //

सचेत जागृत बुद्धि ही अपने मन में उठते हर विकार (भाव लहर) को देख पाती है... (वृत्ति का नृत्य इसलिए कहा है की मन के अधीन हो मनुष्य बस नाचा नाचा ही फिरता है)...  मन के विचारों को जब बुद्धि के समक्ष रखा जाता है तब ज्ञान की अग्नि (बुद्धि द्वारा की जाने वाली विवेचना) में विचारों को तपा कर सही-गलत का भान होता है...और तभी मनुष्य द्वारा किया गया कार्य उचित होता है.

Comment by Vindu Babu on December 11, 2013 at 2:06pm

आदरणीया उच्च कथ्य से सजे हुए दोहे बार-बार पढने को बाध्य कर रहे हैं।
पहला,दूसरा,तीसरा और पांचवा दोहा तो बिलकुल सुपाच्य है,पर चौथा दोहा 'दृष्ट' का अर्थ समझाने के बाद भी पूर्णतय: समझ नहीं सकी,मुख्यत: तीसरा चरण।

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 11, 2013 at 12:37pm

दोहावली प्रयास पर सराहना के लिए धन्यवाद आ० सौरभ जी 

जिन दो स्थानों पर प्रवाह के लिए मुझे संशय था.. आपने वही दो अंश इंगित किये हैं... 

पांचवा दोहा बहुत वक्त देने पर इस रूप में ढला है...और समय कहीं कायाकल्प न कर दे :)))) फिर भी मैं प्रयास करती हूँ :))

सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 11, 2013 at 12:42am

बड़ा गूढ़ छंद-प्रयास !! वाह !

प्रस्तर सम जड़ हृदय वह - प्रस्तर सम वह जड़ हृदय

अंतिम दोहा और समय मांगता है लेकिन कथ्य दुरूह है.. अतः कैसे प्रवहमान कीजियेगा उसे.. वो आपके माथे. .. :-)))))


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 7, 2013 at 8:24pm

दोहों के भाव और सन्देश पर आपके अनुमोदन के लिए धन्यवाद आ० सुशील सरना जी 

Comment by Sushil Sarna on December 7, 2013 at 7:35pm

ati sundr bhaavon se susajjit dohavali....is sandeshpark prastuti ke liye haardik badhaaee


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 6, 2013 at 6:06pm

हार्दिक आभार प्राची जी स्पष्ट हुआ 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 6, 2013 at 4:39pm

प्रस्तुत दोहावली का कथ्य भाव तात्पर्य सराहने के लिए हार्दिक धन्यवाद आ० लक्ष्मण प्रसाद लड़ीवाला जी, आ० संदीप कुमार पटेल जी, अरुण जी .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 6, 2013 at 4:37pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी 

बहुत बहुत धन्यवाद दोहावली सराहने के लिए...

//सजग बुद्धि को दृष्ट है  ....इसमें द्रष्ट शब्द आपने किस अर्थ में लिया है ??समझा देंगी तो पढने का मजा दुगुना हो जाएगा//

दृष्ट शब्द को उसके सामान्य अर्थ 'पूर्णतः व्यक्त' में ही लिया गया है आदरणीया........

दृष्ट = वि० [सं०√दृश् (देखना)+क्त] १. देखा हुआ। २. दिखाई पड़नेवाला। ३. प्रकट या व्यक्त होनोवाला। पुं० १. दर्शन। २. साक्षात्कार। ३. सांख्य में प्रत्यक्ष प्रमाण की संख्या।

उम्मीद है अब यह दोहा आपको स्पष्ट हुआ होगा..

सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 6, 2013 at 3:56pm

प्रिय प्राची जी बहुत सुन्दर सात्विक दोहे रचे हैं सभी एक से बढ़कर एक ,एक जगह अटक रही हूँ ---सजग बुद्धि को दृष्ट है  ....इसमें द्रष्ट शब्द आपने किस अर्थ में लिया है ??समझा देंगी तो पढने का मजा दुगुना हो जाएगा आपको बहुत- बहुत बधाई इन अनुपम दोहों पर. 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"अच्छा है। "
3 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय , ग़ज़ल के दूसरे शेर       'ग़म-ए-दौलत मिली है किस्मत से…"
4 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"विषय मुक्त होने के कारण लघु कथा लिखने का प्रयास किया है , अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त…"
5 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय भाईजी  फागुन आया ऐसा छाया, बाग़ आम का है बौराया भरी मंजरी ने तरुणाई, महक रही सारी…"
5 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी , सुझाव और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।  चौपाई विधान में 121…"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय भाईजी  चौपाई की मुक्त कंठ से प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार । चौपाई विधान में…"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"शब्द बाण…"
6 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक जी, रचना/छंदों पर अपनी राय रखने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।  //तोतपुरी ... टंकण…"
14 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"ग़ज़ल को इतना समय देने के लिए, शेर-दर-शेर और पंक्ति-दर-पंक्ति विस्तार देने के लिए और अमूल्य…"
14 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय,  आपका कोटिश: धन्यवाद कि आपने विस्तृत मार्ग दर्शन कर ग़ज़ल की बारीकियाँ को समझाया !"
14 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय नमस्कार, आपने  अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया दी बहुत शुक्रिया। ग़म-ए-दौलत से मेरा इशारा भी…"
16 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  आदरणीय अजय गुप्ता अजेय जी सादर, प्रथम दो चौपाइयों में आपने प्रदत्त चित्र का सुन्दर वर्णन…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service